योग केवल व्यायाम नहीं, आत्मशुद्धि की वैज्ञानिक प्रक्रिया है” – डॉ. अश्वनी कौशिक



‎हरिद्वार, 14 जून। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 की श्रृंखला में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत हरिद्वार जनपद के लक्सर, रुड़की और भगवानपुर ब्लॉकों में भव्य योग शिविर एवं आरोग्य मेलों का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रीय जनसमुदाय ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

‎लक्सर ब्लॉक में आयोजन की बागडोर संभालते हुए प्रभारी अधिकारी डॉ. अश्विनी कौशिक ने योग के गुण रहस्य विषय पर योग साधकों को विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन दिया। उनके साथ डॉ. विश्वजीत मांझी, डॉ. सौरमी तथा योग अनुदेशक प्रतिभा, पुष्पा ने आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। लक्सर ब्लॉक के प्रभारी अधिकारी डॉ. अश्वनी कौशिक ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि – “योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मा, मन और शरीर की शुद्धि की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह मानसिक संतुलन, भावनात्मक स्थिरता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी है। यदि हम प्रतिदिन योगाभ्यास को जीवनशैली में शामिल करें तो अनेक शारीरिक व मानसिक व्याधियों से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी पवन कुमार सैनी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। डॉ घनेंद्र वशिष्ठ डॉ विक्रम सिंह रावत डॉ वीरेंद्र सिंह रावत विनय, रमेश, सुशील सहित अन्य ब्लॉक कार्मिकों ने कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया।

‎रुड़की ब्लॉक में कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. आरती पाठक ने नोडल अधिकारी के रूप में किया, जबकि लिंक ऑफिसर के रूप में डॉ. योगेंद्र ने सहकार्य किया। योग सत्रों का संचालन योग प्रशिक्षक श्री सुनील कुमार एवं योगेंद्र सैनी ने किया। इस अवसर पर टीम के सदस्य डॉ. नवीन दास, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. ऋचा, स्टाफ सदस्य शैफाली पाठक, कुसुम, अरविंद तोमर व सतीश की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।

‎कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक प्रमुख श्रीमती लुबना राव ने योग के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। अनुभव साझा करते हुए ब्लॉक प्रमुख ने योग को जीवन का अभिन्न अंग बताया।
‎विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर खंड विकास अधिकारी मनोज कोठारी एवं के.के. कांडपाल ने योग के सार्वजनिक लाभों पर अपने विचार साझा किए।

‎भगवानपुर ब्लॉक में डॉ. नवीन दास के मार्गदर्शन में आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। उन्होंने योग को एक समग्र चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत करते हुए दैनिक जीवन में इसके नियमित अभ्यास पर बल दिया।

‎इन आयोजनों का उद्देश्य योग के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना था, जिसे प्रतिभागियों ने पूरे मनोयोग से आत्मसात किया।  



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