भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर – द्वितीय दिवस

,    लक्सर हरिद्वार** में आयोजित **भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर** के द्वितीय दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साह, रचनात्मकता और सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से किया गया तत्पश्चात कक्षा 12 की छात्राओं द्वारा वीणा वादिनी ज्ञान की देवी अपनी दया बरसा देना सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई I शिविर के दूसरे दिन की गतिविधियों का मुख्य विषय **“कला, संगीत एवं नृत्य”** रहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, कल्पनाशीलता तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की प्रभारी डॉ संतोष कुमार चमोला ने बताया कि भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य केवल भाषाई ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक चेतना और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना भी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए द्वितीय दिवस की गतिविधियों को कला, संगीत और नृत्य जैसे रचनात्मक माध्यमों से जोड़कर आयोजित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सीखने के साथ-साथ आनंद और आत्म-अभिव्यक्ति का अवसर प्राप्त हो सके। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों के उत्साहपूर्ण स्वागत के साथ हुआ। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कला, संगीत एवं नृत्य के महत्व से परिचित कराते हुए बताया कि ये केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और संस्कृति की अभिव्यक्ति के प्रभावी माध्यम हैं। विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत में संगीत और नृत्य की महत्ता तथा कला के सामाजिक और शैक्षिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।

**कला (Art) गतिविधि** के अंतर्गत विद्यार्थियों को चित्रकला एवं रचनात्मक कला से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दिया गया। विद्यार्थियों ने *प्रकृति, मेरा विद्यालय, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति* जैसे विषयों पर आकर्षक चित्र बनाए। रंगों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और भावनाओं को सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया। कई विद्यार्थियों ने पोस्टर एवं रचनात्मक कलाकृतियाँ बनाकर सामाजिक संदेश भी प्रस्तुत किए। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कला गतिविधि ने विद्यार्थियों की सृजनात्मक सोच और सौंदर्यबोध को नई दिशा प्रदान की। कुमारी राजनंदनी ने सपनों का घर दीपांशु ने कार और आरुष ने हरा भरा संसार आदि विषयों पर चित्र बनाएं I

**संगीत (Music) गतिविधि** विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों ने समूह एवं एकल प्रस्तुति के माध्यम से प्रेरक गीत, लोकगीत तथा सांस्कृतिक गीत प्रस्तुत किए। मधुर स्वरों और ताल-लय से वातावरण संगीतमय हो उठा। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संगीत की मूल अवधारणाओं, स्वर, लय और ताल के महत्व से परिचित कराया। कुमारी तानिया कक्षा 12 द्वारा गढ़वाली नृत्य प्रस्तुत किया गया जबकि कक्षा 11 की छात्राओं द्वारा हरियाणवी नृत्य प्रस्तुत किया गया कक्षा 6 की छात्रों द्वारा बांसुरी वादन किया तथा कक्षा 7 के छात्र शिवम ने ढोल की थाप से कार्यक्रम को सुरमई बना दिया I समूह गायन के माध्यम से विद्यार्थियों में सहयोग, अनुशासन और आत्मविश्वास की भावना भी विकसित हुई। संगीत सत्र ने विद्यार्थियों को आनंद और आत्मिक संतोष का अनुभव कराया।

**नृत्य (Dance) गतिविधि** के अंतर्गत विद्यार्थियों ने भारतीय लोक एवं सांस्कृतिक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। रंग-बिरंगी वेशभूषा, उत्साहपूर्ण प्रस्तुति और तालबद्ध नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यार्थियों ने समूहों में मिलकर विभिन्न सांस्कृतिक धुनों पर नृत्य प्रस्तुत किए, जिससे विद्यालय परिसर उल्लास और ऊर्जा से भर उठा। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, मंच प्रस्तुति कौशल तथा टीमवर्क की भावना को सुदृढ़ किया।

द्वितीय दिवस की सभी गतिविधियाँ **अनुभवात्मक एवं सहभागितापूर्ण शिक्षण** पर आधारित रहीं। शिक्षकों ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी सक्रिय रूप से भाग ले और अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का अवसर प्राप्त करे। विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह और ऊर्जा के साथ सभी गतिविधियों में भाग लेकर यह सिद्ध किया कि कला, संगीत और नृत्य शिक्षा के प्रभावी एवं प्रेरणादायक माध्यम हैं।

विद्यालय के **प्रधानाचार्य श्री सुभाष चंद त्यागी** ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि कला, संगीत एवं नृत्य जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करती हैं तथा शिक्षा को आनंदमय बनाती हैं।

कार्यक्रम के सफल संचालन में **कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चमोला** के निर्देशन एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में **श्रीमती गीता देवी, श्री संजीव कुमार, श्री हरेंद्र सिंह रावत, श्रीमती रीता देवी, श्री ब्रह्मपाल सिंह, श्री नौशाद तथा श्रीमती पूनम** ने सक्रिय योगदान दिया। सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए गतिविधियों को व्यवस्थित, रोचक और ज्ञानवर्धक बनाने का प्रयास किया।

भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का द्वितीय दिवस विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी, रचनात्मक एवं आनंदमय अनुभव सिद्ध हुआ। विद्यार्थियों ने आगामी गतिविधियों के प्रति उत्साह व्यक्त किया और विद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि यह शिविर विद्यार्थियों की प्रतिभा, अभिव्यक्ति क्षमता एवं सांस्कृतिक समझ को और अधिक सशक्त बनाएगा।

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