गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अभियंत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में “हर घर तिरंगा” रैली

 हरिद्वार-गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अभियंत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में “हर घर तिरंगा” रैली एवं विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन*
आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत गुरुकुल कांगड़ी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के अभियंत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में गुरुवार को “हर घर तिरंगा” कार्यक्रम बड़े उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ संपन्न हुआ। संकाय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई के स्वयंसेवकों ने हाथों में तिरंगा थामे संकाय प्रांगण से भव्य रैली निकाली। रैली के दौरान विद्यार्थियों ने “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “राष्ट्र प्रथम” जैसे गगनभेदी नारे लगाए, जिससे वातावरण पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंग गया।
रैली के उपरांत आयोजित मुख्य कार्यक्रम में संकाय के डीन प्रो. विपुल शर्मा ने स्वतंत्रता के महत्व पर प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि “हमारी आज़ादी अनगिनत बलिदानों और त्याग का परिणाम है, अतः इसका संरक्षण और सम्मान करना हम सबका परम कर्तव्य है।” उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम और देशहित की भावना अपनाने का आह्वान किया।
इसके बाद एक भारत श्रेष्ठ भारत के समन्वयक डॉ. लोकेश कुमार जोशी ने अपने उद्बोधन में “राष्ट्र प्रथम” के मूल मंत्र पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्तिगत उपलब्धियों से पहले राष्ट्र का उत्थान होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि हर छोटा प्रयास, यदि राष्ट्रहित में किया जाए, तो वह बड़े परिवर्तन का कारण बन सकता है।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में विभाजन की विभीषिका पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ. एम. एम. तिवारी ने विद्यार्थियों को 1947 के विभाजन के ऐतिहासिक कारणों, परिस्थितियों और इसके भीषण परिणामों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार लाखों लोग विस्थापित हुए, अनगिनत परिवार बिछड़ गए और देश ने अपार क्षति झेली। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि हमें इतिहास से सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सदैव सजग और एकजुट रहना होगा।
उन्होंने यह भी कहा की विभाजन की विभीषिका के बारे में जानकर यह अनुभूति होती है कि आज का शांतिपूर्ण और सुरक्षित जीवन लाखों लोगों के संघर्ष, बलिदान और आंसुओं की अमूल्य धरोहर है, जिसे हमें हर कीमत पर संजोकर रखना होगा।
एनएसएस समन्वयक डॉ. मयंक पोखरियाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य समझना होगा। यह केवल तिरंगा लहराने या उत्सव मनाने तक सीमित न रहकर हमारे आचरण, कर्तव्य और जीवनशैली में झलकना चाहिए।और श्री अश्विनी ने भी अपने विचार रखते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका, उद्देश्य और समाज में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वयंसेवकों को सेवा, समर्पण और एकता की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। चर्चा के दौरान कई छात्रों ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर डॉ. सुनील पंवार,डॉ. संजीव लांभा, डॉ. देवेंद्र सिंह ,श्री योगेश कुमार, श्री ऋषि प्रजापति, श्री. अमन त्यागी, डॉ. आशीष धमांदा, श्री शिवकुमार, श्री कुलदीप सहित संकाय के कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे सदैव देश की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा के लिए कार्य करेंगे, तथा स्वतंत्रता के मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे।

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