बिल एवं बिजली के निजीकरण का विरोध करने की अपील की

देहरादून
22 जनवरी, 2026

*ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने सभी राज्य सरकारों से 22–23 जनवरी की बैठक में विद्युत (संशोधन) बिल एवं बिजली के निजीकरण का विरोध करने की अपील की*

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि वे 22–23 जनवरी को होने वाली राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) बिल और बिजली के निजीकरण के प्रयासों के खिलाफ एकजुट और दृढ़ रुख अपनाएँ।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को भेजे गए पत्र में कहा है कि प्रस्तावित बिल के प्रावधान राज्य विद्युत वितरण निगमों (DISCOMs) की वित्तीय सेहत, संघीय ढाँचे, उपभोक्ता हितों तथा देश के सार्वजनिक बिजली तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह बिल निजी कंपनियों को बिना किसी निवेश के सार्वजनिक धन से निर्मित नेटवर्क का उपयोग करने और केवल उच्च-राजस्व वाले औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को चुनकर सेवा देने की अनुमति देता है। इससे राज्य की वितरण कंपनियाँ गहरे आर्थिक संकट में पहुँच जाएँगी।

AIPEF द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों को भी भेजी गई है। उल्लेखनीय है कि 22–23 जनवरी को होने वाली ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे जिसका मुख्य एजेंडा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल और डिस्कॉम का निजीकरण है।

शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि अनिवार्य ओपन एक्सेस, बड़े उपभोक्ताओं के लिए सार्वभौमिक आपूर्ति दायित्व (USO) समाप्त करने और क्रॉस-सब्सिडी खत्म करने जैसे प्रावधानों से राज्य के डिस्कॉम पर केवल घाटे वाले ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं का बोझ रह जाएगा। इससे किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों पर 30–50% तक की भारी बिजली दर वृद्धि का खतरा बढ़ जाएगा।

इसके साथ ही सट्टा आधारित बिजली बाजार, केंद्रीकृत नीति निकाय और समानांतर इलेक्ट्रिक लाइन अथॉरिटी जैसे प्रावधान राष्ट्र के संघीय ढाँचे और ग्रिड की स्थिरता को नुकसान पहुँचाते हैं।

*सार्वजनिक संपत्तियाँ निजी मुनाफे के लिए नहीं सौंपी जा सकतीं*

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यह बिल ‘बैकडोर प्राइवेटाइजेशन’ है, जिसके माध्यम से सार्वजनिक धन से निर्मित संपत्तियों को निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है, जबकि वे न तो निवेश करेंगी, न रखरखाव, न ही सार्वभौमिक सेवा की जिम्मेदारी लेंगी। इससे बिजली महंगी और आम जनता तथा किसानों की पहुंच से दूर हो जाएगी तथा कृषि और छोटे उद्योग सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

पत्र में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने राज्यों से अपील की है कि 22–23 जनवरी की बैठक में प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) बिल का स्पष्ट और दृढ़ विरोध करें। वितरण क्षेत्र के निजीकरण एवं “शेयर्ड नेटवर्क” की अवधारणा को सख्ती से खारिज करें। बिजली जैसे समवर्ती सूची (Concurrent List) विषय पर राज्यों के अधिकारों की रक्षा करें।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा कि बिजली एक बुनियादी सार्वजनिक सेवा है और इसे सस्ता, सुलभ व जन–हितकारी रखने की जिम्मेदारी सरकारों की है। किसी भी प्रकार के एकतरफा निजीकरण प्रयास का देशभर के इंजीनियर, कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता पुरजोर विरोध करेंगे।

 

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