भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर – पंचम दिवस

हरिद्वार

**पीएमश्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, मुण्डाखेड़ा कलां, लक्सर, हरिद्वार** में आयोजित **भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर** के पंचम दिवस का आयोजन सांस्कृतिक चेतना, देशभक्ति एवं प्रेरणादायी सीख से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। शिविर के पाँचवें दिन की प्रमुख गतिविधि **“संस्कृति की समझ विकसित करना तथा स्थानीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों एवं कलाकारों के प्रति जागरूकता”** रही। इस अवसर पर विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय इतिहास और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से परिचित कराया गया, जिससे उनमें गौरव, सम्मान और राष्ट्रीय चेतना की भावना विकसित हुई।

भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा ज्ञान के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पंचम दिवस की गतिविधियों को सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय प्रेरणास्रोतों की जानकारी से जोड़ा गया, ताकि विद्यार्थी अपने क्षेत्र, समाज और राष्ट्र के गौरवशाली योगदान को समझ सकें।
कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ किया गया छात्र-छात्राओं के द्वारा प्रातः कालीन प्रार्थना स्वयं राष्ट्रगान का गायन किया गया तत्पश्चात आरुष कक्षा 11 दो के छात्र द्वारा स्वागत एवं परिचय सत्र संचालित किया गया। श्री ज्ञान प्रकाश शर्मा ने विद्यार्थियों को समझाया कि संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है, जो उसकी भाषा, परंपराओं, लोककला, रीति-रिवाजों और जीवन मूल्यों में अभिव्यक्त होती है। विद्यार्थियों को यह बताया गया कि अपनी संस्कृति की समझ विकसित करना केवल इतिहास जानना नहीं, बल्कि अपनी पहचान, मूल्यों और विरासत को समझना भी है। एलईडी पर बाल सामाजिक फिल्म दिखाई गई स्थानीय नायकों के क्रम में वीर अब्दुल हमीद के पराक्रम को दर्शाया गया I
गतिविधि के अंतर्गत विद्यार्थियों को **स्थानीय संस्कृति और परंपराओं** के विविध पक्षों से परिचित कराया गया। लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पहनावा, स्थानीय त्योहार और सामाजिक रीति-रिवाजों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने अपने परिवार और समुदाय से जुड़े सांस्कृतिक अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम में सहभागिता और आत्मीयता का वातावरण बना। शिक्षकों ने बताया कि भारतीय संस्कृति विविधताओं में एकता का संदेश देती है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
पंचम दिवस की गतिविधि का महत्वपूर्ण भाग **स्थानीय नायकों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति जागरूकता** रहा। विद्यार्थियों को उन महान व्यक्तित्वों के संघर्ष, त्याग और योगदान के बारे में जानकारी दी गई जिन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों की प्रेरणादायी गाथाओं ने विद्यार्थियों में देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान की भावना को प्रबल किया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इन महान विभूतियों के जीवन से जुड़े प्रसंगों को सुना और उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा प्राप्त की।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को **स्थानीय कलाकारों और लोककला परंपराओं** के महत्व से भी अवगत कराया गया। शिक्षकों ने बताया कि कलाकार समाज की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने का कार्य करते हैं। लोक संगीत, चित्रकला, हस्तशिल्प एवं अन्य कलात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से हमारी संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है। विद्यार्थियों को स्थानीय कलाकारों के योगदान तथा कला के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए **कहानी-वाचन, चर्चा सत्र, प्रश्नोत्तरी एवं समूह प्रस्तुति** जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने स्थानीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और कलाकारों से संबंधित जानकारी साझा की तथा अपने विचार व्यक्त किए। इस प्रक्रिया ने उनमें शोध, संवाद और प्रस्तुतीकरण कौशल को भी प्रोत्साहित किया। कई विद्यार्थियों ने प्रेरणादायी व्यक्तित्वों पर संक्षिप्त वक्तव्य प्रस्तुत किए, जिसने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बना दिया।
पंचम दिवस की गतिविधियों ने विद्यार्थियों में **सांस्कृतिक जागरूकता, सामाजिक संवेदनशीलता एवं राष्ट्रीय गर्व** की भावना को मजबूत किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और विरासत को समझना एवं संरक्षित करना भी हमारी जिम्मेदारी है। इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और सकारात्मक नागरिक मूल्यों का विकास करने में सहायक होती हैं।
विद्यालय के **प्रधानाचार्य श्री सुभाष चंद त्यागी** ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति, इतिहास और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों की जानकारी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर विद्यार्थियों को केवल भाषाई ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक समझ से भी समृद्ध कर रहा है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में **कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चमोला** के निर्देशन एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में **श्री ज्ञान प्रकाश शर्मा, श्री अनवरुल हुसैन, श्री उमेश कंडवाल, श्री ब्रह्मपाल सिंह, मोहम्मद जावेन, श्री नौशाद, श्रीमती पूनम, सुनीता, गीता तथा महेंद्र सिंह** ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी शिक्षकों एवं सहयोगियों ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए गतिविधियों को रोचक, ज्ञानवर्धक और सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास किया।
भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का पंचम दिवस विद्यार्थियों के लिए संस्कृति, इतिहास और प्रेरणा से भरपूर अनुभव सिद्ध हुआ। विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ भागीदारी करते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान एवं जागरूकता व्यक्त की। विद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।

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