बिजली इंजीनियरों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का नोटिस दिया

27 जनवरी, 2026  देहरादून

*बिजली क्षेत्र के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ बिजली इंजीनियरों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का नोटिस दिया : संसद में बिल लाए जाने पर तात्कालिक ‘लाइटनिंग एक्शन’ की चेतावनी**

देशभर के राज्य विद्युत निगमों, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), दामोदर घाटी निगम (DVC) तथा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में कार्यरत बिजली अभियंताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल का औपचारिक नोटिस माननीय केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को सौंप दिया है।

हड़ताल की घोषणा करते हुए AIPEF के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यह आंदोलन देश के लाखों बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं में व्याप्त उस गहरे आक्रोश और चिंता की अभिव्यक्ति है, जो सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को कमजोर करने वाली नीतियों के खिलाफ लगातार बढ़ती जा रही है।

AIPEF ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संसद के बजट सत्र के दौरान इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पेश किया गया, तो देशभर के बिजली अभियंता एवं कर्मचारी तत्काल ‘लाइटनिंग एक्शन’ शुरू करेंगे, जिसमें कार्यस्थल छोड़कर व्यापक जन-आंदोलन शामिल होगा।

श्री दुबे ने कहा,

> “बिजली देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और ग्रामीण जीवन की रीढ़ है। इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 सस्ती बिजली, सार्वजनिक स्वामित्व, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।”

AIPEF ने केंद्र सरकार द्वारा थोपे जा रहे आक्रामक निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वितरण में मल्टी-लाइसेंसिंग, जबरन स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसमिशन में PPP एवं TBCB मॉडल, संचालन का आउटसोर्सिंग और नौकरियों का ठेकेदारीकरण बिजली क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है।

फेडरेशन ने चंडीगढ़ के विफल निजीकरण मॉडल का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम), राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इसी तरह के प्रयोगों के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।

AIPEF की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

• इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को तत्काल वापस लिया जाए, जो निजीकरण और मल्टी-लाइसेंसिंग को बढ़ावा देता है, क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करता है, बिजली दरें बढ़ाता है और मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को निजी कंपनियों को सौंपने का रास्ता खोलता है।

• शांति अधिनियम (SHANTI Act) 2025 को वापस लिया जाए, जो परमाणु सुरक्षा और जवाबदेही को कमजोर कर निजी एवं विदेशी पूंजी के लिए द्वार खोलता है।

• राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 को रद्द किया जाए, जो उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण—तीनों क्षेत्रों में निजीकरण को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाती है।

• बिजली निगमों के निजीकरण पर पूर्ण विराम लगाया जाए, तथा उत्तर प्रदेश के PVVNL एवं DVVNL के निजीकरण के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए।

• ठेका प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए, जो बिना सामाजिक सुरक्षा के पूरे क्षेत्र को चला रहे हैं।

• सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही भारी रिक्तियों को भरने हेतु तत्काल भर्ती की जाए।

• बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए।

• केंद्र सरकार द्वारा योजनाओं और निर्देशों के जरिए राज्यों पर दबाव डालकर संघीय ढांचे पर किए जा रहे हमले को रोका जाए।

श्री दुबे ने चेतावनी देते हुए कहा,

> “यदि सरकार ने गंभीर संवाद से इनकार किया, तो बिजली आपूर्ति में होने वाले किसी भी व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सार्वजनिक बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बिजली अभियंताओं के पास संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

 

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