शिव की शरण में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु भक्तों का कल्याण स्वयं ही निश्चित हो जाता है-स्वामी कैलाशानंद गिरी

हरिद्वार, 31 जुलाई। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा है कि भगवान शिव की आराधना व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है और उसके जीवन का निर्माण करती है। शिव की शरण में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु भक्तों का कल्याण स्वयं ही निश्चित हो जाता है। नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर में श्रावण मास में अनवरत जारी विशेष शिव आराधना के दौरान श्रद्धालु भक्तों को शिव महिमा का महत्व समझाते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि भगवान शिव को सावन का महीना अति प्रिय होता है। देवादीदेव महादेव के भक्ति आराधना के पर्व का महत्व समझते हुए सभी को नियमानुसार भगवान आशुतोष का जलाभिषेक और दुग्ध अभिषेक अवश्य करना चाहिए। भगवान शिव की उपासना से अर्थ काम मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। सावन में की गई शिव आराधना व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए 108 बार अवतरण लिया। कलयुग में सूक्ष्म आराधना से ही प्रसन्न होकर महादेव भक्तों का कल्याण करते हैं। भगवान शिव ने विषपान कर सृष्टि की रक्षा की और आज भी अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु भक्तों का संरक्षण कर भगवान उसे भवसागर से पार लगाते हैं। महादेव के प्रति आस्था और समर्पण व्यक्ति का जीवन सफल बनाती है और गंगा तट पर महादेव की आराधना का महत्व और बढ़ जाता है। संपूर्ण शिव परिवार के साथ में मां गंगा की असीम कृपा भी श्रद्धालु भक्तों पर बरसती है। इसीलिए सभी को श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। जब भौतिकता का मुंह खत्म हो जाए और ऐसी स्थिति आए कि ज्ञानेंद्रियां भी बेकाम हो जाएं। उस स्थिति में शून्य आकार लेता है और जब शून्य भी अस्तित्व हीन हो जाए तो वहां भगवान शिव का प्राकट्य होता है। भगवान शिव शून्य से भी परे हैं। जब कोई व्यक्ति भौतिक जीवन को त्याग कर सच्चे मन से मनन करता है तो उसे भगवान शिव की प्राप्ति होती है। एक आकार और अलौकिक शिव देवों के देव महादेव को श्रावण मास समर्पित है। स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के शिष्य स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन सुबह व शाम महादेव शिव की भव्य आरती कर विश्व कल्याण की कामना की जाती है। इस अवसर पर स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, स्वामी विवेकानंद ब्रह्मचारी, आचार्य पवनदत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पांडे, स्वामी कृष्णानंद ब्रह्मचारी, स्वामी रघुवीरानन्द, महंत लालबाबा, बाल मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, स्वामी अनुरागी महाराज, आचार्य प्रमोद, पुजारी सुधीर पाण्डे सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

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