ग्रहण का सूतक लगने के बाद और ग्रहण समाप्त होने तक कुछ भी खाना नहीं चाहिए-श्रीमहंत रविन्द्रपुरी

हरिद्वार, 7 नवम्बर। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के संचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा स्नान का विशेष महत्व है। देवोत्थान एकादशी को शयन से उठने के उपरांत भगवान विष्णु कार्तिक पूर्णिमा से ही संसार का संचालन अपने हाथों में लेते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। पूरे कार्तिक मास व्रत रखने वाले श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करते हैं। उन्होंने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा का आयुर्वेद की दृष्टि से भी खास महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा से सर्दी की शुरूआत होती है। इसलिए गंगा स्नान के उपरांत तिल का दान करना चाहिए और जल में तिल डालकर भगवान सूर्यदेव को अध्र्य देना चाहिए। मंगलवार को होने वाले चन्द्र ग्रहण के विषय में जानकारी देते हुए श्रीमहंत रविन्द्रपंुरी महाराज ने कहा कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु की परिधि में जब चन्द्रमा आता है तो चन्द्र ग्रहण होता है। वर्तमान में मेष राशि में राहुल चल रहा है। मेष राशि में ही चन्द्रमा का आगमन हुआ है। सूर्य और चन्द्रमा जीवन का भाग है। चन्द्रमा मन का प्रतीक है। ग्रहण का असर प्रकृति के प्रत्येक कण पर होता है।, उन्होंने कहा कि चन्द्रमा को ग्रहण से बचाने के लिए ही भगवान शिव ने उन्हें मस्तक पर धारण किया है। ग्रहण के दौरान भगवान शिव का व्रत रखें। ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव की आराधना करें। भगवान शिव की आराधना करने से चन्द्रमा को शक्ति प्राप्त होती है। ग्रहण का सूतक लगने के बाद और ग्रहण समाप्त होने तक कुछ भी खाना नहीं चाहिए। ग्रहण के पहले और ग्रहण के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए।

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