पंजनहेड़ी गोलीकांड प्रकरण में दो आरोपियों की जमानत यात्रिका खारिज

हरिद्वार। कथित तौर पर आत्मरक्षा में गोली चलाने का दावा करने वाले आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने निरस्त कर दी। साथ ही मातृसदन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इनके द्वारा आरोप लगाने से कोर्ट अपना निर्णय नहीं बदल सकता। हालांकि इस मामले में मुख्य आरोपी तरुण चौहान को 22 दिन बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं सकी है।
ग्राम पंजनहेड़ी ग्राम में विकसित की गई उषा टाउनशिप कॉलोनी में मातृसदन की अवैध प्लॉटिंग की शिकायत पर एचआरडीए की ओर से से भूमि पैमाइश के आदेश दिए गए। 28 जनवरी को जांच करने पहुंची प्रशासन की टीम के सामने कॉलोनाइजर अमित चौहान और शिकायतकर्ता के साथ आए अतुल चौहान, भाजयुमो के प्रदेश मंत्री तरूण चौहान एवं अन्य के बीच हुई मारपीट के दौरान चली गोली में सचिन चौहान और कृष्णपाल को गोली लग गई। मामले में अतुल चौहान जेल चला गया, लेकिन अभी इस गोलीकांड प्रकरण में आरोपी भाजयुमो का प्रदेश मंत्री तरुण चौहान पुत्र दीपक, गौरव चौहान पुत्र प्रदीप कुमार, अभिषेक चौहान उर्फ सिम्मी पुत्र सतवीर, अभिषेक पुत्र त्रिलोक चंद गिरफ्तार नहीं किए जा चुके हैं। इस मामले में अभिषेक चौहान उर्फ सिम्मी और गौरव चौहान की अग्रिम जमानत याचिका डाली गई। सामने आया कि अभिषेक चौहान के खिलाफ पहले भी मुकदमा दर्ज है, यानि उसका आपराधिक इतिहास है।
मामले में आवेदक के वकील उत्तम सिंह चौहान ने पक्ष रखा, जबकि अमित चौहान पक्ष की ओर से अधिवक्ता आरके सिंह, अजय चौहान, नीरज धारीवाल ने रखा।
डीजीसी (आपराधिक) इंद्रपाल बेदी ने बताया कि तथ्य सामने आया कि सह-आरोपी और आवेदक पूर्व नियोजित इरादे से घटनास्थल पर गए थे। यह बात दो सह-आरोपियों के आचरण से भी ज़ाहिर होती है, क्योंकि उनके पास लाइसेंसी पिस्तौल थी जिसका इस्तेमाल अपराध करने में किया गया। अपराध करने के बाद आवेदक अन्य सह-आरोपियों अतुल, तरुण और सह-आरोपी ब्रह्मचारी सुदानंद के साथ घटनास्थल से भाग गए। यह भी स्वीकार किया गया तथ्य है कि कुछ सह-आरोपी फरार हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिनमें वर्तमान आवेदक भी शामिल हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने ने टिप्पणी की कि अब मातृसदन के लोग इस न्यायालय के विरुद्ध झूठी और निराधार शिकायतें लिखेंगे, लेकिन मातृसदन के लोगों और सह-आरोपी ब्रह्मचारी सुधानंद का यह कृत्य इस न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों को उनके न्यायिक कर्तव्यों के पालन से नहीं रोकेगा।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने आदेश दिया कि अवलोकन और अपराध की गंभीरता एवं प्रकृति को देखते हुए, अभिषेक चौहान और गौरव चौहान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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