भारत में चीतों को लाने के लिए दोनों देशों के पर्यावरण मंत्रालयों के बीच एक समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना होगा.

दिल्ली. भारतीय जंगल में चीतों को फिर से लाने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम रहे अधिकारियों ने बताया कि नामीबिया के साथ इस बारे में बातचीत एक कदम और आगे बढ़ गई है.अफ्रीकी देश नामीबिया भारत में 35-40 चीतों को भेजने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है. ये अधिकारी अभी हाल ही में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इस दक्षिण अफ्रीकी देश का दौरा करके लौटे हैं. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 18 से 22 फरवरी तक नामीबिया का दौरा किया. मध्य प्रदेश में ही सबसे पहले चीतों को रखा जाना है. चीतों को लाने के बारे में भारतीय अधिकारियों की नामीबिया की ये पहली यात्रा थी.प्रतिनिधिमंडल में शामिल डब्ल्यूआईआई के डीन यादवेंद्रदेव झाला ने कहा कि नामीबियाई अधिकारियों के साथ हमारी बातचीत के दौरान हमने पांच साल की अवधि में 35-40 चीतों को भेजने के लिए कहा. वे इसके लिए सहमत हो गए हैं. झाला ने कहा कि अगले कदम के तहत भारत में चीतों को लाने के लिए दोनों देशों के पर्यावरण मंत्रालयों के बीच एक समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना होगा. एशियाई चीते का भारत के जंगलों से सफाया हो गया था और 1952 में सरकार ने औपचारिक रूप से इसे विलुप्त घोषित कर दिया था. भारत में चीतों को फिर से बसाने की इस परियोजना का उद्देश्य नामीबिया और संभवतः दक्षिण अफ्रीका से भी अफ्रीकी चीतों को बैचों में लाकर भारतीय जंगलों में फिर से बसाना है. देश में कई स्थानों पर जंगलों में उनको बसाने की तैयारी है.झाला ने कहा कि पहले बैच में लाए जाने वाले चीतों की संख्या अभी तय नहीं की गई है. हम 10-12 चीतों को एक साथ लाना चाहते हैं, लेकिन सटीक संख्या चीतों की पेशकश पर निर्भर करेगी. चीतों की पहली खेप को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में बसाया जाएगा. पर्यावरण मंत्रालय ने 2021 की शुरुआत में कहा था कि उसने उसी साल नवंबर की शुरुआत में चीतों के पहले बैच को कुनो नेशनल पार्क में लाने की योजना बनाई थी. बाद में देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण इस परियोजना में देरी हुई.

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