पतंजलि अनुसन्धान संस्थान और सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

 

हरिद्वार, 01 मई 2026: वैश्विक स्तर पर शिक्षा, अनुसंधान और विशेष रूप से समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान और ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन कल नई दिल्ली स्थित ऑस्ट्रेलिया उच्चायोग में संपन्न हुई वार्ता के ही आगे की कार्यवाई के अंतर्गत किया गया है। यह साझेदारी दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक साक्ष्य-आधारित सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक निर्णायक पहल है, जो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी, जो ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में स्थित एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान है, इस साझेदारी के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सहयोग न केवल दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाएगा, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के लिए भी एक सशक्त आधार तैयार करेगा। यह सहयोग न केवल अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देगा, बल्कि स्वास्थ्य, विज्ञान और समाज के व्यापक हित में ठोस योगदान भी सुनिश्चित करेगा।
आगे उन्होने बताया कि आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का विज्ञान है और जब इस पारंपरिक ज्ञान का आधुनिक अनुसंधान से समन्वय होता है, तब उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। पतंजलि के पास भारत में विद्यमान असीम संभावनाओं को विश्व पटल पर स्थापित करने का सामर्थ्य है और यह वैश्विक सहयोग उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस समझौता ज्ञापन समारोह में सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी के प्रो-वाईस-चांसलर (रिसर्च एंड एजुकेशन इम्पैक्ट) प्रोफेसर बेन रॉश कहा कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान, शिक्षण और छात्र-आदान-प्रदान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना है। इसके अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाले विषयों पर अनुसंधान करेंगे। यह समझौता ज्ञापन सनातन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के मध्य एक सेतु का कार्य करेगा।
सदर्न क्रॉस यूनिवर्सिटी के नेशनल सेंटर फॉर नैचुरोपैथिक मेडिसिन के फाउंडेशन डायरेक्टर प्रोफेसर जॉन वार्डल ने आगे बताया कि इस समझौते के तहत दोनों संस्थान साझा अनुसंधान परियोजनाओं का विकास करेंगे, सरकारी अनुदान के लिए संयुक्त आवेदन करेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध प्रकाशनों को बढ़ावा देंगे।
आगे उन्होने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान की आधारशिला है और यह साझेदारी ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
पतंजलि के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने समझौता ज्ञापन के अवसर पर कहा कि
पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करना ही समय की आवश्यकता है।
यह साझेदारी अनुसंधान और नवाचार के नए मानक स्थापित करेगी और दोनों संस्थान साथ मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य के लिए प्रभावी और साक्ष्य-आधारित समाधान विकसित करेंगे।
यह समझौता ज्ञापन वैश्विक सहयोग, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है। यह न केवल दोनों संस्थानों के लिए, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे विभिन्न ज्ञान प्रणालियों और संस्कृतियों के समन्वय से एक बेहतर, स्वस्थ और अधिक समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

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