गंगा की गोद में योग करना आत्मा से जुड़ने जैसा है” — स्वामी दयामूर्त्यानंद जी महाराज

 

हरिद्वार

हरिद्वार के पवित्र स्वामी विवेकानंद घाट पर 20 जून 2025 की सायं, गंगा की लहरों की गूंज और वेद मंत्रों की धुन के बीच जब सूर्य अस्ताचल की ओर अग्रसर था, तब घाट पर योग और आस्था का एक अनोखा संगम साक्षात दिखाई पड़ा। आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग, उत्तराखंड के तत्वावधान में आयोजित गंगा आरती के साथ योग कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बना, बल्कि इसने हरिद्वार की सांस्कृतिक आत्मा को भी झंकृत कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार और सामूहिक प्रार्थना से हुई। उसके बाद योगाचार्यों के मार्गदर्शन में गंगा तट पर एक साथ सैकड़ों लोगों ने योगाभ्यास किया। इस अनूठे आयोजन के मुख्य अतिथि, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में कहा, “गंगा की गोद में योग करना आत्मा की गहराइयों से जुड़ने जैसा है। योग हमें केवल स्वस्थ नहीं करता, यह हमें सजग, संयमी और सार्थक बनाता है। गंगा आरती और योग का यह समन्वय भारत की ऋषि परंपरा का जीवंत उदाहरण है।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ अवनीश उपाध्याय नोडल अधिकारी राष्ट्रीय आयुष मिशन हरिद्वार ने की। उन्होंने कहा कि हरिद्वार जैसे पवित्र स्थल पर इस प्रकार के आयोजन न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि जनमानस में योग को जीवनशैली के रूप में अपनाने की प्रेरणा भी देते हैं।

इस अवसर पर चिकित्सा अधिकारी डॉ नवीन दास, डॉ करुणा नेगी, डॉ योगेंद्र सिंह,, डॉ अश्वनी, डॉ सॉरमी, डॉ पूजा राय, डॉ रेनू सिंह और डॉ मनीषा चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। फार्मेसी अधिकारियों में शीशपाल सिंह, प्रदीप शाह, सुप्रिया बिष्ट, विजय रयाल, अजय तिवारी, सुशील रावत, अमित दरमोड़ा, शशिकला, शीला चमोली, नवीन थपलियाल, मनीष सजवान और कैलाश भट्ट की सक्रिय भूमिका रही। वहीं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों रूपेश गोविंद, अरविंद वर्मा, अंकुर, रघुवीर सिंह, रोहतास, सुशील, रमेश, प्रहलाद, विनीत, विनय, विक्रम सिंह और राकेश डंगवाल ने व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाला।

योग सत्र को गरिमा प्रदान की योग प्रशिक्षकों – नीलू चौहान, दीपक पांडे, शालू, पुष्पा देवी, अंशु रानी, निकुंज उपाध्याय, प्रतिभा सैनी, अदिति वर्मा और प्राकृतिक चिकित्सा सहायक श्रीमती निशा भट्ट ने। पंचकर्म सहायक कोमल और नंदलाल, तथा स्टाफ नर्स शीतल और वर्षा चौहान ने भी इस अवसर पर अपने दायित्वों का सफल निर्वहन किया।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ योगेंद्र एवं डॉ अश्वनी कौशिक द्वारा किया गया, जबकि संपूर्ण समन्वय में डॉ अवनीश उपाध्याय, जिला नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय आयुष मिशन, हरिद्वार और डॉ घनेन्द्र वशिष्ठ, नोडल अधिकारी, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 की प्रमुख भूमिका रही।

गंगा की आरती की लौ जब हवा में थिरक रही थी और सामने बैठे प्रतिभागी ध्यान में लीन थे, तब यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक जीवंत अनुभव बन गया—जहां योग ने शरीर को और गंगा आरती ने आत्मा को शुद्ध किया। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जब योग और संस्कृति का संगम होता है, तब राष्ट्र की चेतना प्रखर होती है।

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