सिर्फ 1 दिन ही क्यो,, महिलाओं को प्रतिदिन महिला दिवस का उत्सव मनाना चाहिए-सरिता सिंह

 हरिद्वार समाचार -वास्तव में,, महिला दिवस तभी सार्थक होगा ,,जब हर महिला अपने से निम्न वर्ग की महिलाओं को आगे बढ़ाने का और खुश होने का अवसर प्रदान करेगी ,हर महिला के चेहरे पर खुशी हो वास्तव में तभी महिला दिवस सार्थक होगा ।सिर्फ 1 दिन ही क्यो,, महिलाओं को प्रतिदिन महिला दिवस का उत्सव मनाना चाहिए।  सदैव ,दूसरों के लिए त्याग ,समर्पण करने वाली नारी सचमुच ईश्वर का दूसरा रूप है क्योंकि ईश्वर भी सृजन कर्ता है ,,और नारी भी सृजन कर्ता है ना केवल सृजन करती है,, वरन् किसी भी परिवार व  समाज का मजबूत आधार, स्तंभ  भी होती है ।जिस परिवार में नारी सशक्त व स्वस्थ होती है उस परिवार में सदैव खुशियों का निवास होता है। प्रत्येक नारी को दूसरी नारी का  सम्मान भी करना चाहिए ।वास्तव में जब तक महिलाएं स्वयं का अन्य महिलाओं का सम्मान नहीं करेंगी ,,,तब तक महिला दिवस मनाने का कोई औचित्य नहीं है ।प्रथमतय: हर महिला को अपना आत्मसम्मान जगाना होगा । स्वाभिमान से जीने का अधिकार ,,जब उन्हें मिलेगा,, तभी हम सही अर्थों में महिला दिवस को सार्थक कर सकते हैं। देवी स्वरूप प्रत्येक नारी को ,अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की मेरी ओर से व  अविरल क्रिएशंस,, की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं 

अपने आसपास के आर्थिक रूप से अक्षम ,, परन्तु मेधावी 4 बच्चों को, स्कूल की यूनीफॉर्म आदि देकर,,एक महिला ने,,दूसरी महिला के परिवार को,, मदद करके,, महिला दिवस मनाया।विदित हो कि,,इन बच्चों के पूरे वर्ष भर के लिए,,किताब कॉपियां तथा युनीफॉर्म का दायित्व,,जन जागृति विकास मंच के द्वारा गत वर्षों से निरन्तर उठाया जा रहा है

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