भारतीय समाज और संस्कृति में समलैंगिक विवाह की कोई अवधारणा नहीं -महंत जसविन्दर सिंह

हरिद्वार, 4 मई। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि यदि समलैंगिक विवाह को मान्यता मिलती है तो समाज के लिए इसके परिणाम काफी गंभीर होंगे। कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि भारतीय समाज व संस्कृति में समलैंगिक संबंध या विवाह की कोई अवधारणा नहीं है। समलैंगिक विवाह या संबंध प्रकृति के विरूद्ध हैं। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के परिणाम हमेशा ही गंभीर हुए हैं। समलैंगिक विवाह को मान्यता दिया जाना सनातन संस्कृति और प्रकृति पर कुठाराघात के समान होगा। परंपरांओं और मान्यताओं के अनुसार ही विवाह मान्य है। समलैंगिक विवाह से समाज को कोई अच्छा संदेश नहीं जाएगा। सभी को इसका विरोध करना चाहिए। महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि जल्द ही अखाड़ा परिषद में इस विषय पर व्यापक विचार विमर्श कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने का समाज पर व्यापक असर होगा। इसलिए समलैंगिक विवाह को मान्यता जैसे विषय पर समाज में व्यापक विचार विमर्श होना चाहिए। इस दौरान महंत खेम सिंह, महंत निर्भय सिंह, महंत गुरमीत सिंह, महंत सतनाम सिंह, संत जसकरण सिह, संत योगेश्वरानंद, संत गौरी बाबा, संत बीर सिंह, संत रवि सिंह आदि संतों ने भी समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए इसे समाज के लिए घातक बताया।

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