हरिद्वार, 13 जुलाई।
देवभूमि उत्तराखंड में “सेवा, सुशासन एवं समर्पण” के अंतर्गत संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत सेवा पखवाड़ा के अवसर पर विकासखंड बहादराबाद, जनपद हरिद्वार में बहुउद्देशीय चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में 122 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क परामर्श एवं औषधियों का वितरण किया गया।
इस अवसर पर डॉ. सतीश कुमार सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय यूनानी चिकित्सालय, पिरान कलियर ने कहा कि “उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। आयुर्वेद, यूनानी एवं योग जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियां केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का आधार हैं। यदि व्यक्ति नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार एवं योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाए तो अनेक रोगों से बचा जा सकता है।”
डॉ. मनीष कुमार गुप्ता, चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय आयुष विंग (पुरुष), हरिद्वार ने कहा कि “सेवा पखवाड़ा के माध्यम से आमजन को उनके घर-घर तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। आयुर्वेद में रोग होने से पहले उसकी रोकथाम पर विशेष बल दिया गया है। जनसामान्य को योग, प्राणायाम, ऋतुचर्या एवं आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर स्वयं तथा अपने परिवार को स्वस्थ रखने का संकल्प लेना चाहिए।”
शिविर में विजय रियाल, फार्मेसी अधिकारी, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मंगलौर; शशिकला, फार्मेसी अधिकारी, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, बहादराबाद; तथा गोविंद एवं सतीश चंद ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए रोगियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं।
इस दौरान उत्तराखंड सरकार के माननीय मंत्री शोभाराम प्रजापति ने आयुष विभाग के स्टॉल का निरीक्षण किया तथा चिकित्सा सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्वयं भी चिकित्सकीय परामर्श लिया और आयुष विभाग द्वारा आमजन के हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
शिविर में चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ योग, प्राणायाम, दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को आयुर्वेद एवं योग को दैनिक जीवन में अपनाकर निरोगी जीवन जीने का संदेश दिया।
बहुउद्देशीय चिकित्सा शिविर में कुल 122 रोगियों ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया तथा आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति विशेष उत्साह एवं विश्वास व्यक्त किया।

