प्रत्येक नागरिक के लिए बाध्यकारी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाए-श्रीमहंत नरेंद्र गिरी

 हरिद्वार समाचार– साधु संतों की सर्वाेच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर योगी सरकार द्वारा लायी गयी नई जनसंख्या नीति का स्वागत और समर्थन किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने जनसंख्या विस्फोट को लेकर अपनी गहरी चिंता भी जाहिर करते हुए कहा है कि देश और प्रदेश में हो रहा तेजी से जनसंख्या विस्फोट कई प्रमुख समस्याओं का कारण भी है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि लगातार बढ़ रही जनसंख्या पर तत्काल रोक लगायी जाए। उन्होंने मांग की है कि सरकार को जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए ऐसा सख्त कानून बनाना चाहिए, जिसे देश और प्रदेश में रहने वाले हर नागरिक को मानना बाध्यकारी हो। उन्होंने कहा है कि जनसंख्या बढ़ने का सीधा प्रभाव अच्छी शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। वहीं नई जनसंख्या नीति का मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा विरोध और इसे अल्लाह की देन बताए जाने पर श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने मुस्लिम धर्म गुरुओं से सवाल किया है कि आखिर बच्चा पैदा करने में अल्लाह की क्या देन है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की है कि वह भी इस कानून को सहृदयता के साथ स्वीकार करें और मुस्लिम समाज में लोगों को कम बच्चे पैदा करने के लिए जागरूक करें। श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण का कानून इतना सख्त होना चाहिए कि अगर दो बच्चे के बाद तीसरा बच्चा कोई पैदा करता है तो उसे वोट देने का अधिकार ना हो, न ही चुनाव लड़ने का अधिकार हो और उसका आधार कार्ड भी न बने और सरकार की तमाम योजनाओं से भी उसे वंचित कर दिया जाए। तभी इस कानून का सही मायने में सख्ती से पालन हो सकता है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा है कि मुस्लिम समाज में तीन शादियों की छूट है। ऐसे में किसी भी मुस्लिम व्यक्ति को प्रत्येक पत्नी से 2 बच्चे पैदा करने की इजाजत कतई नहीं होनी चाहिए। पत्नी चाहे तीन हों लेकिन बच्चे दो ही होने चाहिए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा है कि देश की बढ़ रही जनसंख्या सबसे बड़ी समस्या है। इसलिए सभी धर्मों के लोग मिलकर ही इस समस्या से निजात पा सकते हैं। उन्होंने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण में जाति और मजहब को बीच में नहीं लाना चाहिए। बल्कि इसे एक चुनौती मानते हुए सबको जनसंख्या नियंत्रण के लिए लाए जा रहे कानून का पालन करना चाहिए।

 

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