उत्तराखण्ड के पेंशनर्स ने उन सभी पेंशन विहीन कार्मिकों का समर्थन किया है जो अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

हरिद्वार, 01 अप्रैल।
बीस साल पहले आज ही के दिन से लागू तथाकथित एन पी एस और अभी इसके नामकरण के बाद यूपीएस का राजकीय पेंशनर्स ने भी जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए सही में पेंशन लागू करने की अपनी मांग दुहराई है। पेंशनर्स ने कहा है कि एनपीएस या यूपीएस आज से 20 साल पहले जन्मे दानव हैं जिसको एक हठधर्मी सरकार ने मूर्खता दिवस पर कर्मचारी शिक्षकों को मूर्ख बनाने के लिए पैदा किया था।

सरकारी पेंशन की 20वीं पुण्यतिथि पर देवभूमि उत्तराखण्ड के पेंशनर्स ने उन सभी पेंशन विहीन कार्मिकों का समर्थन किया है जो अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

राजकीय पेंशन को समाप्त किये जाने की 20वीं वर्षी पर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड राजकीय पेंशनर्स समन्वित मंच ने एक बैठक कर पेंशन के लिए आंदोलित कार्मिकों का समर्थन करते हुए केंद्र और राज्यों की सरकारों को कर्मचारी विरोधी करार दिया है।
पेंशनर्स मंच के संयोजक बी पी चौहान की अध्यक्षता और मुख्य संयोजक जे पी चाहर के संचालन में कनखल स्थित एक निजी संस्थान पर बैठक कर सरकार को चेतावनी दी गई है। बैठक में केंद्र सरकार पर पेंशन को अपदस्त करने का भी आरोप लगाया है।
मंच के मुख्य संयोजक जे पी चाहर ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेंशनर विरोधी वित्त विधेयक पास कर पेंशनर्स के हितों पर डाका डालने का प्रयास किया गया है जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा और प्राणर्पण तक इसका विरोध किया जाएगा। चाहर ने बताया कि जिस तरह विधेयक पास कर 2004 से सरकारी पेंशन को खत्म किया गया था उसी तरह सरकारी पेंशन को आठवें वेतन आयोग में पुनरीक्षण से अलग कर पेंशनर्स को बाँटदेना चाहती है।
मंच के वरिष्ठ संयोजक एलसी पाण्डे, बीपी चौहान ने केंद्र सरकार के दोगले रवैया पर आक्रोश जताते हुए कहा कि एक ओर पेंशनर विरोधी विधेयक लोकसभा में पास करना व राज्य सभा की तौयारी और दूसरी ओर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लीपापोती के वयान पेंशनर्स को आंदोलन के लिए उकसाने वाले हैं।
मंच के एक अन्य वरिष्ठ संयोजक आरके जोशी ने चेतावनी दी है कि यदि आठवें वेतन आयोग का जल्दी गठन नहीं किया गया और उसमें पेंशन संशोधन को शामिल नहीं किया गया तो राष्ट्रव्यापी भीषण आंदोलन होगा तथा वरिष्ठ नागरिक श्रेणी के पेंशनर सड़क पर उतरेंगे।
इस अवसर पर बीपी चौहान, जेपी चाहर, आरके जोशी, ललित पाण्डेय के अलावा, मधू सिंह, मंजू सिंह, पवन कुमारी, पंकज गुप्ता, अनिरुद्ध शर्मा, ई पीके सिंह, ई वीर सिंह, ई एमपी सिंह, मनोज शर्मा, अतर सिंह, विमल प्रताप सिंह, डॉ सत्यवीर सिंह, ई रामवीर सिंह , रामसरीख, भूपेंद्र सिंह, मोहन लाल शर्मा, रमेश चंद सैनी, आर के जैन, सुखवंश सिंह, रामअवतार आदि ने भी विचार व्यक्त किये।

 

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