जिस प्रकार कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अखाड़े की संपत्ति खुर्दबुर्द करने की नीयत से निर्मल अखाड़े के संतो को धमकी दी जा रही है। वह अत्यन्त चिंताजनक है-महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री

हरिद्वार, 29 जून। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने कहा है कि जिस प्रकार कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अखाड़े की संपत्ति खुर्दबुर्द करने की नीयत से निर्मल अखाड़े के संतो को धमकी दी जा रही है। वह अत्यन्त चिंताजनक है। पुलिस प्रशासन को समय रहते असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ अखाड़े के संतों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। प्रैस को जारी बयान में महंत देवेंद्र सिंह ने कहा कि देश का समस्त संत समाज जानता है कि श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष एवं महंत जसविन्दर सिंह महाराज अखाड़े के कोठारी और वे अखाड़े के सचिव हैं। नासिक, उज्जैन, प्रयागराज व हाल में संपन्न हुए हरिद्वार कुंभ मेला सहित कई कुंभ मेले अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव ंिसंह महाराज के नेतृत्व में संपन्न हुए हैं। महंत देवेंद्र सिंह महाराज ने कहा कि असामाजिक तत्व पूर्व में भी अखाड़े की एक्कड़ कलां शाखा व निर्मला छावनी पर कब्जे का प्रयास कर चुके हैं। जिसे तत्कालीन अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी के नेतृत्व में संत समाज व पुलिस प्रशासन के सहयोग से नाकाम कर दिया गया था। कब्जे का प्रयास करने वाले संत वेशधारी असामाजिक तत्वों के खिलाफ कनखल व पथरी थाने में मुकद्मे भी दर्ज हैं। महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने कहा कि कुछ स्थानीय संतों की मदद से असामाजिक तत्व स्वयं को निर्मल अखाड़े के पदाधिकारी प्रचारित कर गैर वैधानिक तरीके से अखाड़े की संपत्ति को खुर्दबुर्द करने की नीयत से अखाड़े के श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज, कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज व अन्य संतों को धमका रहे हैं। महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने कहा कि संपत्ति को लेकर हरिद्वार में कई संतों की हत्या हो चुकी है। इसलिए मुख्यमंत्री व डीजीपी को पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अखाड़े के संतों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए और असामाजिक तत्वों की धमकी को देखते हुए 6 जुलाई को अखाड़े व संतों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात करना चाहिए। यदि अप्रिय घटना घटित होती है तो संत समाज आंदोलन करने को मजबूर होगा। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को भी मामले की गंभीरता को देखते हुए बैठक बुलाकर असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए साथ ही मुख्यमंत्री व डीजीपी से वार्ता करनी चाहिए।

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