हरिद्वार
पीएमश्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, मुण्डाखेड़ा कलां, लक्सर, हरिद्वार में आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर के चतुर्थ दिवस का आयोजन ज्ञान, संस्कृति एवं स्वास्थ्य जागरूकता से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
श्री शिविर का शुभारंभ मां सरस्वती वंदन के उपरांत हुआ I तत्पश्चात सभी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित किए समूह गान तथा राष्ट्रगान के उपरांत सभी छात्र-छात्राओं ने अपना स्थान ग्रहण किया I शिविर के चौथे दिन की प्रमुख गतिविधि “स्थानीय भोजन एवं मसाले, सब्जियाँ, फल आदि की जानकारी” रही, जिसमें विद्यार्थियों को स्थानीय खान-पान, पारंपरिक खाद्य पदार्थों, मसालों तथा फल एवं सब्जियों के महत्व से परिचित कराया गया। यह गतिविधि विद्यार्थियों के लिए अत्यंत रोचक, ज्ञानवर्धक एवं अनुभवात्मक सिद्ध हुई।
भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा के साथ-साथ भारतीय जीवन शैली, संस्कृति एवं स्थानीय परंपराओं से जोड़ना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए चतुर्थ दिवस की गतिविधियों को स्थानीय भोजन और खाद्य संस्कृति से जोड़ा गया, ताकि विद्यार्थी अपने क्षेत्र की खाद्य विरासत, पोषण संबंधी ज्ञान तथा पारंपरिक जीवन शैली के महत्व को समझ सकें। कार्यक्रम का आरंभ विद्यार्थियों के स्वागत एवं गतिविधि परिचय के साथ हुआ। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय खाद्य पदार्थ और मसाले न केवल स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी होते हैं I गतिविधि के अंतर्गत विद्यार्थियों को स्थानीय भोजन की विविधता और उसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने अपने क्षेत्र में प्रचलित पारंपरिक व्यंजनों जैसे – दाल-चावल, रोटी, खिचड़ी, पराठा, बाजरे एवं अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी साझा की। श्री कृष्ण कुमार ने बताया कि स्थानीय भोजन मौसमी परिस्थितियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप होता है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने घरों में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों के बारे में चर्चा की, जिससे सीखने का वातावरण संवादात्मक एवं सहभागितापूर्ण बन गया।
श्रीमती गरिमा कुकसाल द्वारा मसालों की जानकारी गतिविधि विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हल्दी, जीरा, धनिया, लौंग, दालचीनी, इलायची, काली मिर्च जैसे मसालों को प्रदर्शित कर विद्यार्थियों को उनकी पहचान, उपयोग एवं औषधीय गुणों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने मसालों की सुगंध पहचानने तथा उनके उपयोग बताने में विशेष रुचि दिखाई। शिक्षकों ने समझाया कि भारतीय रसोई में प्रयुक्त मसाले स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वास्थ्य संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को सब्जियों एवं फलों की विविधता और उनके पोषण संबंधी महत्व से भी अवगत कराया गया। टमाटर, आलू, पालक, गाजर, लौकी जैसी सब्जियों तथा आम, केला, सेब, अमरूद और पपीता जैसे फलों के पोषक गुणों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि नियमित रूप से फल एवं हरी सब्जियों का सेवन स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न फलों एवं सब्जियों के नाम, उनके रंग, स्वाद तथा स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी साझा की।
गतिविधि को अधिक रोचक और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए “फल–सब्जी पहचानो” तथा “मसाला पहचानो” जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इन गतिविधियों में भाग लेते हुए सही पहचान और जानकारी प्रस्तुत की। कई विद्यार्थियों ने स्थानीय भोजन और स्वस्थ आहार से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए, जिससे कार्यक्रम और अधिक जीवंत एवं ज्ञानवर्धक बन गया। चतुर्थ दिवस की यह गतिविधि केवल खाद्य पदार्थों की जानकारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों में स्वास्थ्य जागरूकता, पोषण संबंधी समझ तथा स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करने का माध्यम भी बनी। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संतुलित आहार, स्वच्छ भोजन और पारंपरिक खाद्य आदतों के महत्व पर भी मार्गदर्शन दिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुभाष चंद त्यागी ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय भोजन और पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़ी जानकारी विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और स्थानीय विरासत के प्रति सम्मान विकसित करती हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चमोला के निर्देशन एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों तथा संकाय सदस्यों ने पहाड़ी व्यंजन झंगोरे की खीर खाई सभी छात्र-छात्राएं अत्यंत प्रसन्नचित हुई तथा उनके द्वारा बड़ी जिज्ञासा वर्ष इस व्यंजन को बनाने में सहयोग प्रदान किया गया I आयोजन को प्रभावी एवं सफल बनाने में श्रीमती गरिमा कुकशाल, श्री कृष्ण कुमार, श्री ब्रह्मपाल सिंह, श्री मोहम्मद शाहज़ेब, श्री नौशाद, श्रीमती पूनम, श्रीमती सुनीता, श्रीमती गीता एवं श्री महेंद्र सिंह ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए गतिविधियों को रोचक, व्यवहारिक एवं ज्ञानवर्धक बनाने का प्रयास किया। भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का चतुर्थ दिवस विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य, संस्कृति और स्थानीय ज्ञान से परिपूर्ण प्रेरणादायक अनुभव सिद्ध हुआ। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए स्थानीय भोजन, मसालों, सब्जियों एवं फलों के महत्व को समझा तथा आगामी गतिविधियों के प्रति भी उत्सुकता व्यक्त की। विद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं व्यवहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।


