ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय में औषधीय एवं फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत

हरिद्वार। ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में जुलाई के अंतिम सप्ताह में औषधीय और फलदार वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी और विख्यात पर्यावरणविद डॉ. आशुतोष पंत के नेतृत्व में हुआ। इस अवसर पर कैंपस डायरेक्टर प्रो. डॉ. डी.सी. सिंह, प्रो. डॉ. के.के. शर्मा, प्रो. डॉ. संजय त्रिपाठी, प्रो. डॉ. सुरेश चौबे, डॉ. अवनीश उपाध्याय, डॉ. पंकज चौहान और महाविद्यालय के अनेक छात्र एवं शिक्षण स्टाफ मौजूद रहे।
डॉ. आशुतोष पंत, जो वर्ष 1987 बैच के गौरवशाली पूर्व छात्र भी रहे हैं, ने महाविद्यालय को अपनी मातृ संस्था बताते हुए कहा कि यदि प्रत्येक कॉलेज के छात्र एक-एक पौधा गोद लेकर उसकी कम से कम तीन साल तक देखभाल का संकल्प लें, तो वृक्षारोपण महज एक कार्यक्रम न रहकर एक सतत पर्यावरणीय आंदोलन बन सकता है। उन्होंने कहा कि छात्र चाहें तो अपने गोद लिए पौधे के साथ नाम की तख्ती भी लगा सकते हैं, जिससे पौधे के प्रति उनका आत्मीय लगाव बढ़ेगा। डॉ. पंत ने यह भी घोषणा की कि यदि कोई अन्य शैक्षणिक संस्थान जिम्मेदारीपूर्वक वृक्षारोपण करना चाहे तो वे निःशुल्क पौधों की व्यवस्था कराने में सहयोग देंगे।
कैंपस डायरेक्टर प्रो. डॉ. डी.सी. सिंह ने कहा कि – “डॉ. पंत हमारे लिए गर्व का विषय हैं। उनका यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करेगा बल्कि छात्रों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करेगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि कॉलेज के प्रत्येक छात्र एक पौधा गोद लेकर उसकी देखभाल करे।”
प्रो. डॉ. के.के. शर्मा ने कहा कि – “औषधीय पौधे न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं बल्कि आयुर्वेदिक शिक्षा का व्यावहारिक पक्ष भी मजबूत करेंगे। छात्रों को इन पौधों से प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर मिलेगा।”
प्रो. डॉ. संजय त्रिपाठी ने कहा कि – “वृक्षारोपण को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यह एक दीर्घकालिक अभियान होगा जिसमें छात्र और शिक्षक समान रूप से भागीदार होंगे।”
प्रो. डॉ. सुरेश चौबे ने कहा कि – “महाविद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि पौधों की देखभाल को नियमित गतिविधियों में शामिल किया जाए, ताकि छात्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।”
डॉ. अवनीश उपाध्याय ने आश्वासन दिया कि – “फार्मेसी विभाग की ओर से सभी पौधों का रोपण किया जाएगा और उन्हें छात्रों को गोद दिलाया जाएगा। हम पौधों की नियमित निगरानी कर उनकी देखभाल सुनिश्चित करेंगे।”
इस अवसर पर लगभग 100 औषधीय एवं फलदार पौधे रोपे गए। डॉ. आशुतोष पंत ने कहा कि यदि प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान इस मॉडल को अपनाए तो आने वाले समय में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन संभव होगा।

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