हरिद्वार
पीएम श्री योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में सभी विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया जा रहा है I इसके अंतर्गत राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अपने परिवेश को जानने, समझने तथा भौतिक रूप से महसूस करने के उद्देश्य से शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया जाता है I इसी परिपेक्ष में अपने आसपास विद्यमान किसी ऐतिहासिक स्थल, राजनीतिक इकाई, औद्योगिक प्रतिष्ठान, पौराणिक स्थल अथवा अन्य अध्ययन की दृष्टि से शैक्षिक भ्रमण हेतु उपयोगी स्थान का भ्रमण कराया जाता है I
पीएम श्री योजना के अंतर्गत अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज मुंडा खेड़ा कला के छात्र छात्राओं द्वारा शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत तीर्थ नगरी ऋषिकेश स्थित विभिन्न पर्यटन स्थलों यथा जानकी सेतु, लक्ष्मण झूला, राम झूला, परमार्थ निकेतन, गीता भवन तथा सुशीला तिवारी औषधि उद्यान का भ्रमण किया गया I अधिकांश छात्र-छात्राओं ने बताया कि वे प्रथम बार जनपद से बाहर भ्रमण किया है I कार्यक्रम के प्रभारी डॉ संतोष कुमार चमोला ने इस हेतु व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हुए सर्वप्रथम आवागमन के लिए बस की व्यवस्था की I इसके साथ ही मार्ग में अल्पाहार स्वच्छ पेयजल एवं भोजन हेतु व्यवस्था की गई I सभी छात्र-छात्राओं को अलग-अलग समूह में विभक्त कर उसके लिए प्रभारी एवं सह प्रभारी नामित किए गए I भ्रमण की संपूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के उपरांत शैक्षिक भ्रमण पर जाने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रातः 7:30 बजे विद्यालय परिसर में एकत्र किया गया I प्रत्येक छात्र-छात्रा को निर्देशित किया गया कि वे भ्रमण के दौरान अपनी डायरी में भ्रमण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करेंगे तथा इस शैक्षिक भ्रमण पर एक विस्तृत रिपोर्ट लिखेंगे I
तदुपरांत ब्राह्मण पर जाने वाले समस्त छात्र-छात्राओं की कक्षा के अनुसार सूची तैयार की गई तथा भ्रमण हेतु प्रस्थान करने के लिए बस में बैठने से पहले सभी की उपस्थिति ली गई I इसके पश्चात विभिन्न आवागमन के साधनों में उनकी बैठक व्यवस्था के अनुसार उन्हें संबंधित प्रभारी के साथ संबंधित बस में बैठाया गया I बालिकाओं के साथ श्रीमती गरिमा कुकशाल, डॉ. नीतू रस्तोगी, रीता चौधरी, सुनीता देवी, ब्रह्मपाल सिंह को तैनात किया गया I प्रत्येक बस में जलपान एवं पेयजल की व्यवस्था की गई I जबकि छात्रों के साथ विनोद कुमार, डॉ संतोष कुमार चमोला, हरेंद्र रावत, उमेश कंडवाल, अनुज कुमार, मोहम्मद जावेद आदि उपलब्ध रहे है I विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा पूर्ण उद्घोष के पश्चात प्रातः 8:00 बजे सभी छात्र-छात्राएं शैक्षिक भ्रमण हेतु लक्सर से ऋषिकेश के लिए रवाना हुए I सभी छात्र-छात्राओं को निर्देशित किया गया कि वे अनुशासन बनाए रखें, कहीं भी किसी प्रकार की कोताही अथवा असावधानी न होने पाए I विद्यालय के प्रधानाचार्य ने मार्ग में पढ़ने वाले सभी स्थानों के बारे में विस्तार से अवगत कराया तथा छात्र छात्राओं को बताया कि क्यों हरिद्वार को मायापुर कहा जाता हैI इसके पश्चात हरिद्वार से नेपाली फार्म के रास्ते ऋषिकेश पहुंचे I वहां पर पार्किंग में बस को रोकने के उपरांत सभी छात्र-छात्राओं को बस से उतार कर पंक्तिबद्ध किया गया तथा फलाहार एवं जलपान वितरण किया गया I यहां पर मां गंगा की अप्रतिम सौंदर्य को देखने का शुभ अवसर प्राप्त हुआI तत्पश्चात सभी छात्र-छात्राओं ने पंक्तिबद्ध होते हुए संबंधित प्रभारी के साथ लक्ष्मण झूला की ओर प्रस्थान किया I इस दौरान अविरल बहती हुई मां गंगा की लहरों को देखते हुए छात्र-छात्राएं प्रसन्नचित हुए तथा उन्होंने बताया कि वह पहली बार इतनी निकटता से गंगा नदी के देख रहे हैं I लक्ष्मण झूला पार करने के उपरांत छात्र-छात्राओं में परमार्थ निकेतन का अवलोकन किया गया I
1. राम झूला : ऋषिकेश में गंगा नदी पर 1986 में निर्मित एक प्रसिद्ध 230-मीटर लंबा लोहे का झूला पुल है, जो मुनि की रेती (शिवानंद नगर) को स्वर्गाश्रम से जोड़ता है। यह पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहनों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से गंगा और आश्रमों का मनमोहक दृश्य दिखता है। यह लक्ष्मण झूला के पास स्थित है और ऋषिकेश का एक प्रमुख पहचान चिन्ह है। यहाँ से गंगा के शांत बहते दृश्य, पहाड़ियों और पास के प्रसिद्ध आश्रमों का आनंद ले सकते हैं। पुल के पास परमार्थ निकेतन, गीता भवन, शिवानंद आश्रम और अनेक दुकानें मौजूद हैं। यहां पर्यटक नाव की सवारी, पैदल यात्रा और शाम को परमार्थ निकेतन में गंगा आरती का अनुभव करते हैं। घूमने के दौरान मौसम सुहावना रहा। यह मुख्य ऋषिकेश शहर से 3 किमी की दूरी पर है और वहां तक ऑटो-टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह स्थान अपनी शांति, आध्यात्मिक माहौल और गंगा के ऊपर रोमांचक सैर के लिए जाना जाता है।
2. लक्ष्मण झूला उत्तराखंड के ऋषिकेश में गंगा नदी पर बना 450 फीट लंबा एक प्रतिष्ठित, ऐतिहासिक सस्पेंशन (झूलता) पुल है। 1939 में बने इस पुल का नाम भगवान राम के भाई लक्ष्मण के नाम पर रखा गया है। यह तपोवन (टिहरी) और जोंक (पौड़ी) को जोड़ता है। सुरक्षा कारणों से 2020 से भारी वाहनों के लिए यह बंद है, लेकिन यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल बना हुआ है। यह पुल 70 फीट की ऊंचाई पर है, जो ऋषिकेश शहर से लगभग 3 किमी दूर है। यह मूल जूट का पुल 1924 की बाढ़ में बह गया था, जिसे बाद में लोहे से पुनर्निर्मित किया गया। यहां से गंगा का मनोरम दृश्य, प्रसिद्ध मंदिर (तेरह मंजिल, लक्ष्मण मंदिर) और आसपास के बाजार हैं। यह राम झूला के करीब है और ऋषिकेश के मुख्य आकर्षणों में से एक है। सुबह का समय यहां आने के लिए सर्वोत्तम समय है। यहां पर कोई प्रवेश शुल्क नहीं है I छात्र-छात्राओं ने आसपास के बाजारों में खरीदारी की तथा मंदिर और प्राकृतिक दृश्यों नदी तट का आनंद लिया। अपने मोबाइल से विभिन्न प्राकृतिक सौंदर्य के स्थलों के चित्र भी लिए I
3. जानकी सेतु : तत्पश्चात ऋषिकेश में स्थित जानकी सेतु वर्तमान में जनता और पर्यटकों के लिए पूरी तरह खुला है। यह मुनि की रेती(कैलाश गेट) को स्वर्गाश्रम(वेद निकेतन) से जोड़ने वाला आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज है। यह सेतु 24 घंटे खुला रहता है और इसमें प्रवेश नि:शुल्क है। इस पुल पर केवल पैदल यात्री और दोपहिया वाहनों (बाइक, स्कूटी, साइकिल आदि) को अनुमति है और चौपहिया वाहनों (कार आदि) का प्रवेश वर्जित है। हर शाम 6:30 से 8:30 बजे तक यहां पर एक भव्य LED लाइट का शो होता है I यह ऋषिकेश का पहला तीन-लेन वाला पुल है। पैदल चलने वालों के लिए बीच में अलग लेन और दोपहिया वाहनों के लिए दोनों किनारों पर अलग लेन बनाई गई हैं ताकि भीड़भाड़ न हो। यह राम झूला से लगभग 800 मीटर से 1.5 किमी की दूरी पर स्थित है। यह पुल गीता भवन, परमार्थ निकेतन और नीलकंठ महादेव मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण और आसान मार्ग प्रदान करता है। पुल के पास मुनि की रेती की तरफ जानकी सेतु पार्किंग है। वर्तमान में सुरक्षा विकल्प के रूप में पास ही नया बजरंग सेतु (ग्लास बॉटम ब्रिज) निर्माणाधीन है, जिसके 2026 की शुरुआत में पूरी तरह खुलने की उम्मीद है।
4. गीता भवन : ऋषिकेश का गीता भवन गंगा नदी के तट पर स्वर्गाश्रम क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक आश्रम और विश्राम स्थल है। यह अपनी सादगी और धार्मिक श्रद्धा के लिए विश्व विख्यात है I इसकी स्थापना 1950 के दशक में श्री जयदयाल गोयन्दका (सेठ जी) और हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाई जी) के प्रयासों से हुई थी, जो गीता प्रेस, गोरखपुर से भी जुड़े थे। यहाँ श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 1000 से अधिक कमरे उपलब्ध हैं। अधिकांश कमरे नि:शुल्क हैं, हालांकि कुछ कमरों के लिए न्यूनतम शुल्क लिया जाता है। यहाँ बहुत ही कम कीमत में शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता है। परिसर के अंदर एक बड़ा प्रवचन हॉल है जहाँ नियमित रूप से सत्संग और प्रवचन होते हैं। आश्रम की दीवारों पर श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक और महापुरुषों के चित्र अंकित हैं। गीता प्रेस बुक स्टॉल में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित धार्मिक पुस्तकें और पत्रिकाएँ रियायती दरों पर मिलती हैं। आश्रम परिसर में शुद्ध आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए एक आयुर्वेदिक औषधालय भी है। यहाँ व्हीलचेयर से आने-जाने के लिए रैंप और सुलभ शौचालयों की व्यवस्था है। यह प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है I
5. परमार्थ निकेतन: परमार्थ निकेतन का शाब्दिक अर्थ है “सभी के कल्याण के लिए समर्पित निवास स्थान”। परमार्थ निकेतन, हिमालय की गोद में स्थित पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा एक सच्चा आध्यात्मिक स्थल है। यह ऋषिकेश का सबसे बड़ा आश्रम है, जो दुनिया के कोने-कोने से आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों को स्वच्छ, पवित्र और पावन वातावरण के साथ-साथ सुंदर उद्यानों का भरपूर आनंद प्रदान करता है। परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में, पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित है। परमार्थ निकेतन सभी के लिए खुला है, यहाँ नस्ल, लिंग, राष्ट्रीयता, धर्म, जाति या पंथ के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। परमार्थ निकेतन में दैनिक गतिविधियों में सुबह की सार्वभौमिक प्रार्थना, दैनिक योग और ध्यान कक्षाएं, दैनिक सत्संग और व्याख्यान कार्यक्रम, कीर्तन और सूर्यास्त के समय विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती शामिल हैं। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी का जीवन-ध्येय है, “ईश्वर और मानवता की सेवा में।” जीवन एक प्रार्थना के रूप में परमार्थ में प्रतिदिन होने वाले कार्यक्रम और गतिविधियाँ हर मिनट, हर पल को प्रार्थना में बदल देती हैं, जो हम सभी को ईश्वर से जोड़ती हैं I परमार्थ निकेतन का मिशन सुंदर गंगा नदी के जीर्णोद्धार से लेकर चिकित्सा शिविरों के आयोजन, बालिका संरक्षण, शिक्षा को बढ़ावा देने और स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी आदतों को लागू करने तक फैला हुआ है। सभी के कल्याण के लिए समर्पित परमार्थ निकेतन में दिव्य कार्यक्रम स्वच्छ, हरित और शांत कार्यक्रम अपने नाम के अनुरूप, परमार्थ विभिन्न प्रकार की धर्मार्थ और धार्मिक परियोजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन करता है। छात्र चाहता हूं धारा पूरे आश्रम का अवलोकन किया गया तथा उन्होंने हाल में बैठकर शांतिपूर्ण माहौल का एहसास किया I परमार्थ निकेतन पर्यावरण की पवित्रता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और धरती माता के प्राकृतिक संतुलन को बहाल करने के लिए समर्पित है। आश्रम में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है Iकक्षा 10 के छात्र आनंद ने बताया कि “अद्भुत। गंगा आरती में शामिल होना बेहद शांतिपूर्ण और अविस्मरणीय अनुभव था। हम स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें परमार्थ निकेतन देखने का अवसर प्राप्त हुआ।” कक्षा 10 के छात्र आरुष ने बताया कि “यहाँ अत्यंत श्रद्धा और उमंग के साथ संपन्न होने वाली संध्या आरती देखकर मैं दंग रह गया। शाम का वातावरण इतना अद्भुत था कि मन पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गया। भक्तिमय अग्नि की ज्वालाओं की पृष्ठभूमि में गंगा नदी बेहद खूबसूरत लग रही थी। यह एक अद्भुत अनुभव रहा।” कक्षा 12 के छात्र प्रियांशु ने बताया कि “मुझे यहाँ घर जैसा महसूस हुआ और अब भी होता है। इस आश्रम के लोग बहुत ही मिलनसार, अच्छे, दयालु और स्नेहशील हैं। आश्रम में रहने का एक सुखद अनुभव होता है।” शिक्षक हरेंद्र रावत ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि “मैंने आश्रम में बहुत शांतिपूर्ण और सुखद समय बिताया। यह एक अद्भुत और स्नेहपूर्ण स्थान है।”
6. दोपहर का भोजन: किसके उपरांत सभी छात्र-छात्राओं, मार्गदर्शक शिक्षकों, शैक्षिक भ्रमण दल के सदस्यों तथा प्रधानाचार्य ने क्षेत्र के प्रतिष्ठित होटल शिवांश इन प्रवेश किया प्रवेश के दौरान होटल के स्टाफ द्वारा तिलक एवं माला पहनकर स्वागत किया गया I यहां पर बने झूले एवं गार्डन का छात्र-छात्राओं ने आनंद लिया I कक्षा 8 के छात्र मानव ने बताया कि मैंने पहली बार इतना बड़ा होटल देखा है जहां से आप अपने आस पास के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारा जा सकता है इसके कमरे, बगीचा भोजन कक्ष, सेमिनार रूम, स्वागत कक्ष, झूले, आदि बहुत सुंदर और आकर्षक हैं I छात्र सोनू सैनी ने बताया कि यहां पर प्रत्येक वस्तु अपने स्थान पर और तरीके से रखी हुई है I इसके पश्चात होटल के मैनेजर ने सभी छात्र-छात्राओं को होटल की व्यवस्थाओं के संदर्भ में विस्तार से बताया तथा अवगत कराया की किस प्रकार एक होटल व्यवसाय संचालित किया जाता है इसके उपरांत सभी ने दोपहर का भोजन ग्रहण कियाI शहरान और सुभान ने बताया की खाना बहुत स्वादिष्ट है तथा हलवा बहुत ही अच्छा था इसलिए हमने दो बार हलवा खाया I
7. हर्बल गार्डन : भोजन उपरांत हमने ऋषिकेश में डॉ. सुशीला तिवारी हर्बल गार्डन का भ्रमण किया, जो औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रदर्शन के लिए एक प्रमुख स्थान है। यह मुनि की रेती क्षेत्र के पास स्थित है और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक शांत गंतव्य है। हर्बल गार्डन की फॉरेस्टर वैजयंती ने बताया कि डॉ. सुशीला तिवारी हर्बल गार्डन में लगभग 126 औषधीय पौधों की प्रजातियाँ हैं, जिनमें कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियाँ (जैसे रावोल्फिया सर्पेंटिना) शामिल हैं। इसमें एक मानव निर्मित झरना और एक एक्यूप्रेशर वॉकवे भी है। इसको देखने का समय सोमवार से शनिवार, सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहता है। यहां पर ₹10 का प्रवेश शुल्क लिया जाता हैI यह हर्बल गार्डन पंचायतनपुर (ऋषिकेश के पास स्थित है। यहाँ 200 से अधिक औषधीय पौधों का संग्रह है I आगंतुक यहाँ से पौधे खरीद भी सकते हैं। कक्षा 12 की छात्रा ने शैक्षिक भ्रमण के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए बताया इस प्रकार के आयोजनों से न केवल हमारा शैक्षिक बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास भी होता है जिससे हमें यह जानने का अवसर प्राप्त होता है की किस प्रकार विभिन्न पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थल स्थापित हुए तथा इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव है I
छात्र गिरीश सैनी ने बताया की पूर्व में भी विद्यालय द्वारा हमें विभिन्न शैक्षिक स्थलों का भ्रमण कराया गया किंतु यह भ्रमण उन सब से अच्छा था I यहां हमें विभिन्न स्थलों के बारे में विस्तार से जानने का अवसर प्राप्त हुआ इसके लिए समस्त विद्यालय परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं I तदुपरांत अल्पाहार ग्रहण किया गयाI इसके पश्चात सभी छात्र-छात्राएं ऋषिकेश से पुनः रायवाला हरिद्वार के रास्ते लक्सर से विद्यालय परिसर में पहुंचे I यहां पर पुनः सभी छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ली गई तथा उनके अभिभावकों के साथ उन्हें अपने घर के लिए प्रस्थान करने के लिए निर्देशित किया I प्रधानाचार्य विनोद यादव ने सभी शिक्षक साथियों और मंत्रालय कार्मिकों का इस सफल आयोजन हेतु हार्दिक आभार और साधुवाद व्यक्त किया I अतः कहा जा सकता है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कक्षा शिक्षण के साथ-साथ शैक्षिक भ्रमण भी नितांत आवश्यक है I
