08 मार्च 2026

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की फेडरल एग्जीक्यूटिव की बैठक 08 मार्च 2026 को देहरादून में आयोजित हुई, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को प्रस्तुत कर पारित कराने की प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता और कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव ने बताया कि बैठक में कहा गया कि बिजली कर्मचारी-इंजीनियर संगठनों, किसान संगठनों तथा उपभोक्ता समूहों सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा बड़े पैमाने पर आपत्तियां और सुझाव दिए जाने के बावजूद सरकार इस बिल को बिना पर्याप्त चर्चा और लोकतांत्रिक परामर्श के आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
फेडेरेशन ने कहा कि जब सरकार ने स्वयं इस बिल पर सुझाव आमंत्रित किए थे, तो यह उसकी जिम्मेदारी थी कि वह पारदर्शिता के साथ बताए कि प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर क्या विचार किया गया और उन्हें किस प्रकार संबोधित किया गया। इन आपत्तियों की अनदेखी कर जल्दबाजी में कानून लाने का प्रयास लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।

फेडरेशन ने परामर्श प्रक्रिया के संचालन पर भी कड़ी आपत्ति जताई। फेडरेशन ने बताया कि 30 जनवरी 2026 को विद्युत मंत्रालय ने प्राप्त सुझावों की समीक्षा के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया, जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के महानिदेशक को शामिल किया गया। यह संगठन लगातार बिजली वितरण क्षेत्र के निजीकरण की वकालत करता रहा है। ऐसे संगठन को राष्ट्रीय कानून को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में शामिल करना पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने दोहराया कि प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 बिजली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को तेज करने के उपकरण प्रतीत होते हैं। फेडेरेशन ने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करेंगी और इसका प्रतिकूल प्रभाव बिजली कर्मचारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

बैठक में बिजली क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ाए जा रहे निजीकरण पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वितरण कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को इक्विटी निजीकरण, प्रबंधन नियंत्रण निजी कंपनियों को देने तथा डिस्कॉम को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने जैसी शर्तों से जोड़ना जबरन निजीकरण थोपने का प्रयास बताया गया।

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने विभिन्न राज्यों में चल रहे आंदोलनों की भी समीक्षा की, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के खिलाफ चल रहे ऐतिहासिक आंदोलन का उल्लेख किया, जो 466 दिनों से अधिक समय से कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं की व्यापक भागीदारी के साथ जारी है।

बैठक में उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के डाकपत्थर और ढालिपुर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं की 76.73 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से निजी क्षेत्र को आवंटित करने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया गया। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए सुरक्षित भूमि को अन्य प्रयोजनों में हस्तांतरित करना लखवार, किशाऊ तथा यमुना बेसिन की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और इसका देशभर के बिजली अभियंता और कर्मचारी जोरदार विरोध करेंगे।
फेडरेशन ने पंजाब सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र की भूमि बेचने और इसका विरोध करने वाले पदाधिकारियों के उत्पीड़न की भी कड़ी निंदा की।

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने पूरे देश के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को भी दोहराया।

इन परिस्थितियों को देखते हुए फेडरेशन ने 10 मार्च 2026 को देशव्यापी “लाइटनिंग एक्शन” का आह्वान किया है। यदि सरकार संसद में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल प्रस्तुत करती है तो देशभर के बिजली अभियंता और कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे और अपने कार्यालयों तथा परियोजना स्थलों के बाहर व्यापक प्रदर्शन करेंगे।

फेडेरेशन इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) तथा अन्य बिजली क्षेत्र के संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष को तेज करेगा।

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने देशभर के सभी बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे एकजुट रहें और बिजली क्षेत्र, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष के लिए तैयार रहें।  

 

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