*हरिद्वार 06 अक्टूबर 2026*
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशों के क्रम में सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) सुश्री नेहा झा एवं सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) निखिल शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में पंजीकरण से छूट प्राप्त होने के दावे के साथ बेची एवं संचालित की जा रही इलेक्ट्रिक स्कूटियों की जाँच हेतु अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ‘बिना आरटीओ पंजीकरण’ अथवा ‘बिना लाइसेंस’ के नाम पर बेचे जा रहे वाहन वास्तव में निर्धारित तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों।
जाँच के दौरान कुछ इलेक्ट्रिक स्कूटियों में पंजीकरण से छूट वाली श्रेणी के लिए निर्धारित गति एवं मोटर पावर संबंधी मानकों के उल्लंघन के प्रथमदृष्टया संकेत मिले। इस पर दो इलेक्ट्रिक स्कूटियों को विस्तृत तकनीकी निरीक्षण एवं परीक्षण हेतु जब्त किया गया। इन वाहनों को बेचने वाले संबंधित विक्रेताओं से स्पष्टीकरण भी माँगा गया है।
तकनीकी जाँच में वाहनों की अधिकतम गति, मोटर की निर्धारित पावर, संबंधित मॉडल के परीक्षण प्रमाणपत्र तथा प्रमाणित तकनीकी विनिर्देशों से वाहन की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा। यह भी जाँचा जाएगा कि वाहन में गति बढ़ाने अथवा उसकी तकनीकी क्षमता बदलने के लिए कोई परिवर्तन तो नहीं किया गया है।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि केवल वाहन के इलेक्ट्रिक होने अथवा विक्रेता द्वारा उसे ‘नॉन आरटीओ’ बताने से पंजीकरण से छूट नहीं मिल जाती। ऐसी छूट निर्धारित शर्तों और अधिकृत परीक्षण संस्था के प्रमाणन पर निर्भर करती है। छूट की शर्तें पूरी न करने वाले वाहनों पर पंजीकरण, उपयुक्त ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा तथा अन्य लागू वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करना आवश्यक है।
निर्धारित सीमा से अधिक गति से चलने वाली स्कूटियों को कम गति वाला वाहन समझकर खरीदना और चलाना सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकता है। विशेष रूप से नाबालिग एवं अनुभवहीन चालक अचानक बढ़ने वाली गति, मोड़ अथवा आपात स्थिति में वाहन पर नियंत्रण खो सकते हैं। इससे चालक के साथ पीछे बैठे व्यक्ति, पैदल यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को भी गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है।
वाहन की प्रमाणित क्षमता के विपरीत गति बढ़ाने या मोटर, कंट्रोलर एवं अन्य तकनीकी उपकरणों में अनधिकृत बदलाव करने से उसकी सुरक्षित संचालन क्षमता प्रभावित हो सकती है। अधिक गति पर वाहन रोकने के लिए अधिक दूरी की आवश्यकता होती है और टक्कर होने पर चोट की गंभीरता भी बढ़ सकती है। इसलिए पंजीकरण से छूट का दावा करके अधिक गति वाले वाहन बेचना केवल दस्तावेजों का विषय नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
अभिभावकों एवं खरीदारों से अपील की गई है कि वे केवल मौखिक आश्वासन या विज्ञापन के आधार पर इलेक्ट्रिक स्कूटी न खरीदें। खरीद से पहले संबंधित मॉडल का अधिकृत परीक्षण प्रमाणपत्र, अधिकतम गति, मोटर पावर तथा पंजीकरण से छूट का आधार विक्रेता से प्राप्त करें। बच्चों के लिए वाहन खरीदते समय उसकी वास्तविक तकनीकी क्षमता और लागू आयु एवं ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी प्रावधानों की जानकारी अवश्य लें।
विक्रेताओं को चेतावनी दी गई है कि वाहनों की गति, पावर अथवा पंजीकरण की आवश्यकता के संबंध में ग्राहकों को भ्रामक जानकारी न दें। तकनीकी परीक्षण एवं प्राप्त स्पष्टीकरण के आधार पर उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेताओं एवं अन्य उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध मोटर यान अधिनियम, 1988 तथा संबंधित नियमों के लागू प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
