हरिद्वार, 31 जनवरी 2026:
पतंजलि अनुसंधान संस्थान एवं वेलनेस, हरिद्वार में ‘योगा ओलंपियाड ओरिएंटेशन एवं ट्रेनिंग प्रोग्राम’ का नौ दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का पतंजलि अनुसंधान संस्थान एवं वेलनेस में संपन्न हुआ। 22 से 30 जनवरी तक चला प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह से सफल रहा। यह कार्यक्रम योगदर्शन, मनोविज्ञान एवं आध्यात्मिकता पर आधारित था, जो आंतरिक शांति एवं आध्यात्मिक चिंतन की दिशा प्रदान करता है।
इस कार्यक्रम में शिक्षा विभाग सिक्किम सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास, समानता एवं योग के व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मेडिटेशन, शंख वादन और हवन पूजन से हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रद्धेय आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि योग प्राचीन भारत की एक समग्र शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक साधना है। योग का उद्देश्य मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना है, जिससे आत्म-साक्षात्कार, मानसिक शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है, तनाव कम होता है तथा अनुशासित जीवनशैली अपनाने में सहायता मिलती है।
इस अवसर पर योगऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि नेचुरोपैथी अर्थात प्राकृतिक चिकित्सा एक औषधि-रहित उपचार पद्धति है, जो शरीर की स्वाभाविक उपचार क्षमता को सक्रिय करती है। इसमें संतुलित आहार, जड़ी-बूटियाँ, जल एवं मिट्टी चिकित्सा, योग, प्राणायाम, उपवास, सूर्य चिकित्सा एवं एक्यूपंक्चर के माध्यम से रोगों के मूल कारणों का उपचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा एक प्रभावी पूरक उपचार पद्धति है, लेकिन गंभीर रोगों में अनुभवी चिकित्सक की सलाह अत्यंत आवश्यक होती है। साथ ही उन्होंने पतंजलि एवं सिक्किम सरकार के संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
पतंजलि वेलनेस के संदर्भ में डॉ. विनिता ने बताया कि आयुर्वेद एवं प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर ही शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है। उपचार की विधि रोग की प्रकृति, रोगी की स्थिति एवं विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर निर्धारित की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. वेदप्रिया आर्या ने पतंजलि की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. विशाल, सौरभ निर्मोही, डॉ. दीपिका, डॉ. विनिता सहित अन्य पतंजलि वैज्ञानिकों की सक्रिय सहभागिता रही।
प्रतिनिधियों ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन, गीता भवन तथा गंगा आरती में भी सहभागिता कर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। सिक्किम से आए प्रतिनिधियों ने पतंजलि गौशाला, गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, हर्बल गार्डन एवं अनुसंधान केंद्र का भ्रमण कर पतंजलि द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम में प्रमुख प्रतिनिधियों के रूप में श्री अधिकारी एवं जामयांग भूटिया उपस्थित रहे। समापन अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें प्रतीक-चिह्न एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने अतिथियों का शाल और स्मृति चिंह् देकर स्वागत किया। पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने आगंतुकों का शाल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया

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