हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ में नवरात्रि के अवसर पर   कन्या पूजन करते हुए योगगुरु स्वामी रामदेव ने सनातन संस्कृति, नारी सम्मान और देश की नैतिक व्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने देश में बहन-बेटियों के साथ वाले दुष्कर्म और भ्रष्टाचार और गोहत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगना चाहिए। स्वामी रामदेव ने कहा कि दुराचारियों के लिए फांसी का प्रावधान होना चाहिए और ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक पर होनी चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार और गोहत्या को लेकर भी कठोर दंड की वकालत करते हुए कहा कि तीन काम तुरंत होने चाहिए। बलात्कारियों को फांसी, भ्रष्टाचारियों को फांसी और गोहत्यारों को भी फांसी।
मीडिया से बातचीत करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति की दृष्टि प्रत्येक स्वरूप में भगवती के दर्शन करने की है। यह केवल कन्याओं तक सीमित नहीं बल्कि समस्त सृष्टि में देवी के दर्शन करने की दिव्य दृष्टि है। उन्होंने कहा कि जिसके भीतर ऐसी दृष्टि होती है वह वासनारहित होता है और दुराचार, अनाचार, व्यभिचार तथा भ्रष्टाचार के बारे में सोच भी नहीं सकता।
स्वामी रामदेव ने कहा, ‘हमारी भारतीय सनातन दृष्टि है, हर नाम, रूप, स्वरूप मात्र कन्याओं में ही नहीं, सब स्वरूप में भगवती का दर्शन करते हैं। यह हमारी दिव्य दृष्टि है। ये सनातन की, भारत की दृष्टि है। जिसकी ये दृष्टि होती है, वो वासनालेस मात्र होता है। वह कभी दुराचार, अनाचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार के बारे में सोच भी नहीं सकता।‘
उन्होंने देश में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ होने वाले दुष्कर्म और समाज में बढ़ती अश्लीलता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं और प्रवृत्तियों का अंत होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत में छोटी-छोटी बेटियों के साथ रेप, दुराचार, व्यभिचार और चारों तरफ वासना का, अश्लीलता का तांडव खत्म होना चाहिए। दुराचारियों को फांसी होना चाहिए, ऐसा कानून बनना चाहिए और फास्ट ट्रैक पर सुनवाई होनी चाहिए।‘
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भारत में किसी मां-बेटी के साथ एक बार भी गलत नहीं हो
स्वामी रामदेव ने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें किसी भी मां-बेटी के साथ कोई गलत कार्य न हो। उन्होंने कहा, ‘भारत में एक मां-बेटी के साथ एक बार भी गलत नहीं हो। ऐसी व्यवस्था हो, ये नवरात्र की उपासना का हमारा सच्चा स्तुति होगी।‘ उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां वर्ष में दो बार नवरात्रि का पूजन होता है और देवी भगवती की आराधना की जाती है, वहां छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म और व्यभिचार की घटनाएं देश को शर्मसार करती हैं।
स्वामी रामदेव ने कहा, ‘भारत जैसा देश जहां दो-दो बार हम नवरात्र का पूजन करते हैं। भारत जैसा देश देवी भगवती की पूजा करते हैं। उस देश में यदि कन्याओं के साथ, छोटी-छोटी बेटियों के साथ रेप, दुराचार, व्यभिचार की घटनाएं आती हैं, तो उससे हमारा भारत शर्मसार होता है।‘
उन्होंने नवरात्रि की पूर्णाहुति के अवसर पर सभी देशवासियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि देश में किसी भी बहन-बेटी के साथ किसी भी प्रकार का गलत कार्य न हो। उन्होंने कहा, ‘ऐसी दुर्घटना भारत में कभी नहीं हो, नवरात्र पर ऐसा संकल्प सब भारतीयों को लेना चाहिए। और पूर्णाहुति पर जब इस संकल्प से हम अनुप्राणित होंगे, तो मां-बहन-बेटियों का आदर रहेगा। इससे सनातन का गौरव बढ़ेगा। भारत का गौरव बढ़ेगा।‘
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तीन काम तुरंत होने चाहिए
स्वामी रामदेव ने अपने वक्तव्य में तीन विषयों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा, ‘यह तीन काम तो तुरंत हो जाना चाहिए। बलात्कारियों को फांसी, दूसरा भ्रष्टाचारियों को फांसी और तीसरा गोहत्यारों को भी फांसी।‘ गोहत्या के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘गाय को हम मां मानते हैं और मां का यहां पर सरेआम यहां कत्ल होता है, इससे बड़ा महापाप क्या हो सकता है।‘
स्वामी रामदेव ने दुष्कर्म और गोहत्या को महापाप बताते हुए इनके उन्मूलन की बात कही। उन्होंने कहा, ‘बलात्कार का महापाप और गोहत्या का महापाप देश से खत्म होना चाहिए और भारत अपनी सद्चरित्रता और पवित्रता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।‘
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नवरात्रि की पूर्णाहुति पर स्वामी रामदेव ने दिया सामाजिक संकल्प का संदेश
स्वामी रामदेव का संदेश नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठान को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने वाला रहा। कन्या पूजन के माध्यम से उन्होंने नारी सम्मान, बच्चियों की सुरक्षा, भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और गो-संरक्षण जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि नवरात्रि की पूर्णाहुति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के संकल्प का अवसर भी बने। उनके अनुसार, ऐसा संकल्प ही सनातन संस्कृति और भारत के गौरव को और मजबूत करेगा।

 

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