वनस्पति विज्ञान के एक दर्जन असिस्टेंट प्रोफेसरों को मिली तैनाती

 

देहरादून, 02 मई 2025
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत दूरस्थ क्षेत्र के राजकीय महाविद्यालयों में वनस्पति विज्ञान के एक दर्जन असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रथम तैनाती दे दी गई है। राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित इन असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति से पर्वतीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मिलेगी साथ ही प्रयोगात्मक एवं शोधात्मक कार्यों में भी युवाओं को मदद मिलेगी।

सूबे के दूरस्थ राजकीय महाविद्यालयों में विज्ञान शिक्षकों की कमी दूर की जा रही है। इसी कड़ी में राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित वनस्पति विज्ञान के 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रदेश के दुर्गम एवं अति दुर्गम क्षेत्र के महाविद्यालयों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिनमें डॉ. दिनेश गिरी को पी.जी. कॉलेज गोपेश्वर, प्रमिला को राजकीय महाविद्यालय कर्णप्रयाग, योगेन्द्र सिंह गुसाई को राजकीय महाविद्यालय अगस्तमुनि, डॉ. हिमानी बडोनी को राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट, उपेन्द्र सिंह को राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ, स्वाति जोशी को राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसैड़, सुश्री दीपिका को राजकीय महाविद्यालय जयहरिखाल, अभय सिंह पंवार को पुरोला महाविद्यालय, सुश्री प्रभा को राजकीय व्यावसायिक महाविद्यालय पैठाणी, रिजवाना तबस्सुम को राजकीय महाविद्यालय द्वाराहाट, प्रतिभा ग्वाल को राजकीय महाविद्यालय बेदीखाल तथा श्रीमती सोनम को राजकीय महाविद्यालय भिकियासैण में प्रथम तैनाती दी गई है। इन नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों की तैनाती से प्रदेश के दुर्गम एवं अतिदुर्गम क्षेत्र के महाविद्यालयों में जहां विज्ञान शिक्षकों की कमी दूर होगी वहीं क्षेत्र के युवा अपने आस-पास के महाविद्यालयों में ही विज्ञान विषय की पढ़ाई कर सकेंगे। इसके साथ ही महाविद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ प्रयोगात्मक एवं शोधात्मक कार्यों का लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा।

*बयान-*
राज्य के महाविद्यालयों में गुणात्मक उच्च शिक्षा के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। महाविद्यालयों में विभिन्न संकायों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की निरंतर तैनाती की जा रही है। इसी कड़ी में राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित वनस्पति विज्ञान के एक दर्जन असिस्टेंट प्रोफेसरों को दूरस्थ क्षेत्र के महाविद्यालयों तैनाती दे दी गई है। इन शिक्षकों की तैनाती से महाविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार होगा साथ ही प्रयोगात्मक एवं शोधात्मक कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। 

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