परमार्थ को समर्पित होता है संतों का जीवन-श्रीमहंत राजेंद्रदास

हरिद्वार, 7 मई। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के पूर्व आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन स्वामी विश्वदेवानंद महाराज की पुण्यतिथि कनखल स्थित श्रीयंत्र मंदिर में संत महापुरुषों के सानिध्य में मनाई गई। इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी एवं महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज ने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी विश्वदेवानंद महाराज युग प्रवर्तक थे। जिन्होंने जीवन पर्यंत अखाड़े की परंपराओं का निर्वहन करते हुए अखाड़े को सदैव उन्नति की ओर अग्रसर किया और विश्व भर में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति की पताका को फहराया। उनके द्वारा समाज को प्रदान की गई शिक्षाएं अनंत काल तक समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि संतों का जीवन सदा परमार्थ को समर्पित रहता है और ब्रह्मलीन स्वामी विश्वदेवानंद महाराज तो साक्षात त्याग एवं तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने अपने जीवन काल में सभी संतो को एक मंच पर लाकर राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में अपना अहम योगदान प्रदान किया। ऐसे महापुरुषों को संत समाज नमन करता है। चित्रकूट से आए महंत रामजी दास महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। ब्रह्मलीन स्वामी विश्वदेवानंद महाराज ज्ञान एवं वैराग्य की पराकाष्ठा थे। उन्होंने सदैव भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के लिए युवाओं को प्रेरणा दी और उन्हें धर्म व संस्कृति के प्रति जागृत किया। धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। इस अवसर पर महंत सूर्य मोहनगिरी, महंत कृष्णा पुरी, महंत सत्यम गिरी, महंत गोविंद दास, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण उपस्थित रहे।

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