कांवड़ मेला–2026 में नगर निगम हरिद्वार की अनूठी पहल

 

हरिद्वार। कांवड़ मेला–2026 को स्वच्छ, व्यवस्थित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में नगर निगम हरिद्वार ने एक और अभिनव पहल प्रारंभ की है। स्नान के उपरांत घाटों पर श्रद्धालुओं एवं कांवड़ यात्रियों द्वारा छोड़े जाने वाले वस्त्रों के वैज्ञानिक संग्रहण एवं पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की विशेष व्यवस्था नेचर फाउंडेशन के सहयोग से की जा रही है।  

आज दिनांक 30 जुलाई 2026 से इस विशेष अभियान का शुभारंभ कर दिया गया है। अभियान के अंतर्गत घाटों पर त्यागे गए वस्त्रों का पृथक संग्रहण किया जा रहा है तथा उन्हें पुनर्चक्रण हेतु निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सराय स्थित एमआरएफ (Material Recovery Facility) सेंटर भेजा जा रहा है।

नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार ने बताया कि प्रत्येक वर्ष कांवड़ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में श्रद्धालु स्नान के बाद अपने पुराने वस्त्र घाटों पर छोड़ देते हैं, जिससे घाटों की स्वच्छता प्रभावित होती है तथा उनके उचित निस्तारण की चुनौती उत्पन्न होती है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम द्वारा यह विशेष व्यवस्था लागू की गई है।

इस अभियान के अंतर्गत 20 प्रशिक्षित कार्मिकों की तैनाती की गई है। मालवीय घाट, सुभाष घाट, नाई घाट, विष्णु घाट एवं सीसीआर घाट सहित प्रमुख घाटों पर व्हील्स वाले डस्टबिन रखे गए हैं। तैनात कार्मिक श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए वस्त्रों को अलग-अलग एकत्र कर निर्धारित मार्ग से तिरछा पुल एवं सीसीआर चौक तक पहुंचा रहे हैं, जहां से नगर निगम की ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से उन्हें सराय स्थित एमआरएफ सेंटर भेजा जा रहा है।

नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार ने बताया कि सराय में प्रत्येक ट्रैक्टर-ट्रॉली का वजन दर्ज किया जा रहा है तथा वस्त्रों को सुरक्षित रूप से सुखाया जा रहा है। कांवड़ मेला समाप्त होने के उपरांत इन वस्त्रों को पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाएगा, जहां उनसे रीसाइकिल्ड कॉटन फाइबर (Recycled Cotton Fibre) तैयार किया जाएगा। इससे न केवल घाटों की स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि वस्त्र अपशिष्ट का पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण भी सुनिश्चित होगा।

उन्होंने कहा कि नगर निगम हरिद्वार का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि अपशिष्ट को संसाधन में परिवर्तित करना भी है। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नगर निगम ने श्रद्धालुओं एवं कांवड़ यात्रियों से अपील की है कि वे स्नान के उपरांत अपने त्यागे गए वस्त्र निर्धारित डस्टबिन में ही डालें तथा इस विशेष अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। नगर निगम को विश्वास है कि जनसहभागिता एवं नेचर फाउंडेशन के सहयोग से कांवड़ मेला–2026 स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक नई मिसाल स्थापित करेगा।

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