**हरिद्वार, 8 जून 2026*
गंगा तट पर बसी धर्मनगरी हरिद्वार एक बार फिर विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन की तैयारियों में जुटी है। वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले को लेकर न केवल देशभर के संतों और श्रद्धालुओं में उत्साह है, बल्कि विदेशों में भी सनातन संस्कृति के प्रति आस्था रखने वाले लोगों के बीच इसकी चर्चा तेज हो चुकी है। कुंभ की तैयारियों का अवलोकन करने और उसकी भव्यता का आकलन करने के लिए देश-विदेश से संतों का हरिद्वार आगमन लगातार बढ़ रहा है।
हरिद्वार में आगामी 14 जनवरी से 20 अप्रैल 2027 तक कुंभ मेला आयोजित किया जाएगा। यह केवल स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, दर्शन, संत परंपरा और सामाजिक समरसता का विराट संगम है। हरिद्वार में चल रही तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि यह आयोजन न केवल व्यवस्थाओं और आधारभूत संरचना के स्तर पर ऐतिहासिक होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
इसी क्रम में सोमवार को श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के अध्यक्ष एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत डॉ. रविन्द्र पुरी जी महाराज के नेतृत्व संतों के एक दल ने कुंभ मेला-2027 के लिए किए जा रहे विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दल में जापान से आए महामंडलेश्वर स्वामी आदित्यानंद गिरी तथा जापानी साध्वी योगमाता सत्य प्रेम गिरी तथा अन्य संत सम्मिलित थे।
संतों के दल ने शंकराचार्य चौक से सिंहद्वार क्षेत्र तक गंगा तट पर विकसित किए जा रहे नए घाटों, सुविधाओं और आधारभूत संरचना का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा स्नान पर्वों के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने संतों को कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार इस महाआयोजन को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न विभाग समन्वित रूप से तेजी से कार्य कर रहे हैं। कुंभ क्षेत्र में घाटों के विस्तार के साथ-साथ सड़क संपर्क को मजबूत किया जा रहा है। यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत आपूर्ति तथा आपदा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करने के लिए आधुनिक तकनीकों एवं बेहतर प्रबंधन प्रणालियों का भी उपयोग किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान संतों के दल ने कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की सराहना करते हुए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता तथा मेला प्रशासन के प्रयासों की जमकर प्रशंसा की। निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत डॉ. रविन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि हरिद्वार में जिस स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं, वे अभूतपूर्व हैं। नए घाटों के निर्माण से श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी और स्नान पर्वों के दौरान भीड़ प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का विश्वव्यापी उत्सव है। आज जो तैयारियां दिखाई दे रही हैं, वे यह विश्वास दिलाती हैं कि कुंभ-2027 दिव्यता, भव्यता और सुरक्षा के नए मानक स्थापित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगले वर्ष दुनिया भर से लाखों साधु-संत, आध्यात्मिक साधक और श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। कुंभ के माध्यम से विश्व समुदाय भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन और अध्यात्म की उस विराट परंपरा का साक्षात्कार करेगा, जिसने हजारों वर्षों से मानवता को दिशा प्रदान की है।
इस दौरान जापान से आए संत आदित्यानंद गिरी विशेष रूप से उत्साहित दिखाई दिए। जापान के टोयामा प्रांत के त्सुरुगी पर्वतीय क्षेत्र में आश्रम स्थापित कर सनातन आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में जुटे स्वामी आदित्यानंद गिरी निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में चल रही तैयारियां अत्यंत प्रभावशाली हैं और इससे स्पष्ट होता है कि भारत अपनी आध्यात्मिक विरासत को लेकर कितना गंभीर है।
उन्होंने कहा कि कुंभ में सहभागिता उनके लिए केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्तरदायित्व भी है। जापान में बड़ी संख्या में लोग भारतीय संस्कृति, योग और सनातन दर्शन के प्रति आकर्षित हो रहे हैं तथा आगामी कुंभ में उनके अनेक शिष्य भी हरिद्वार आने की योजना बना रहे हैं। उनके अनुसार कुंभ भारत की आध्यात्मिक चेतना का ऐसा जीवंत स्वरूप है, जिसकी अनुभूति दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है।
जापानी साध्वी योगमाता सत्य प्रेम गिरी भी हरिद्वार में चल रही तैयारियों को देखकर अत्यंत प्रभावित नजर आईं। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर आयोजित होने वाला कुंभ मानवता को जोड़ने वाला आध्यात्मिक महोत्सव है। यह ऐसा अवसर है, जहां विभिन्न देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक ही भावना—आध्यात्मिक उन्नयन और आत्मिक शांति—के लिए एकत्रित होते हैं।
उन्होंने कहा कि गंगा के पवित्र तट पर कुंभ में सम्मिलित होना उनके लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय होगा। उनके अनुसार कुंभ सनातन परंपरा का सर्वोच्च उत्सव है और स्वाभाविक रूप से पूरी दुनिया के लोगों में इसके प्रति गहरा आकर्षण रहता है। यह आयोजन विश्व को भारतीय अध्यात्म, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के संदेश से जोड़ने का कार्य करता है।
गंगा तट पर आकार ले रहे नए घाट, आधुनिक सुविधाएं, संत समाज का उत्साह और विदेशों तक फैली कुंभ की चर्चा यह संकेत देती है कि हरिद्वार एक बार फिर दुनिया को भारतीय अध्यात्म, सनातन संस्कृति और आस्था की विराट शक्ति का साक्षात्कार कराने के लिए तैयार हो रहा है।


