हरिद्वार
पीएमश्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, मुण्डाखेड़ा कलां, लक्सर, हरिद्वार में आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर के षष्ठम दिवस का आयोजन ज्ञान, जिज्ञासा और अनुभवात्मक अधिगम के वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिविर के छठे दिन की प्रमुख गतिविधि “नदियों, पर्वतों, ऐतिहासिक स्मारकों आदि के नामों के माध्यम से इतिहास एवं भूगोल का ज्ञान” रही। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की ऐतिहासिक एवं भौगोलिक धरोहरों से परिचित कराया गया, जिससे उनमें देश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा के प्रति समझ एवं सम्मान की भावना विकसित हुई।
भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा अधिगम के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान, सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ना है। इसी उद्देश्य के अंतर्गत षष्ठम दिवस की गतिविधियों को इतिहास और भूगोल के ज्ञान से जोड़ा गया, ताकि विद्यार्थी सीखने को केवल पुस्तकीय जानकारी तक सीमित न रखकर उसे अनुभवात्मक और रोचक रूप में ग्रहण कर सकें।
कार्यक्रम का आरंभ विद्यार्थियों के स्वागत एवं विषय परिचय के साथ हुआ। श्री तेजपाल सिंह ने विद्यार्थियों को बताया कि इतिहास और भूगोल केवल विषय नहीं हैं, बल्कि वे हमारे अतीत, वर्तमान और प्राकृतिक परिवेश को समझने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि नदियाँ, पर्वत और ऐतिहासिक स्मारक किसी राष्ट्र की पहचान और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक होते हैं।
गतिविधि के अंतर्गत विद्यार्थियों को भारत की प्रमुख नदियों के बारे में जानकारी दी गई। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी जैसी नदियों के उद्गम, प्रवाह क्षेत्र तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न नदियों के नाम बताए और उनके महत्व के बारे में जानकारी साझा की। श्रीमती सुषमा देवी ने समझाया कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि सभ्यताओं के विकास और कृषि, व्यापार तथा सांस्कृतिक जीवन की आधारशिला भी रही हैं।
इसके पश्चात विद्यार्थियों को भारत के प्रमुख पर्वतों एवं पर्वत श्रृंखलाओं की जानकारी दी गई। हिमालय, अरावली, विंध्य और सतपुड़ा जैसी पर्वत श्रृंखलाओं के भौगोलिक महत्व, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने मानचित्र और चित्रों के माध्यम से पर्वतों की पहचान की तथा उनसे संबंधित रोचक तथ्यों को जाना। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों की भौगोलिक समझ और अवलोकन क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण ऐतिहासिक स्मारकों की जानकारी से संबंधित सत्र रहा। विद्यार्थियों को ताजमहल, लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट, चारमीनार और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी दी गई। इन स्मारकों के निर्माण, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक महत्व को सरल एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने चित्रों और प्रस्तुति के माध्यम से ऐतिहासिक स्थलों को पहचाना तथा उनसे जुड़े तथ्य जानने में विशेष रुचि दिखाई।
गतिविधि को और अधिक सहभागितापूर्ण बनाने के लिए मानचित्र पहचान, प्रश्नोत्तरी, चित्र पहचान तथा समूह चर्चा जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने समूहों में मिलकर नदियों, पर्वतों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम पहचानने तथा उनके बारे में जानकारी साझा करने में सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता ने कार्यक्रम में उत्साह और प्रतिस्पर्धा का वातावरण उत्पन्न किया, जिससे विद्यार्थियों में सीखने के प्रति और अधिक रुचि दिखाई दी।
षष्ठम दिवस की गतिविधियों ने विद्यार्थियों में इतिहास और भूगोल के प्रति जिज्ञासा, राष्ट्रीय धरोहरों के प्रति सम्मान तथा पर्यावरणीय और सांस्कृतिक समझ को विकसित किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि अपने देश की प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी होना प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है और उनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुभाष चंद त्यागी ने विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यापक बनाती हैं और उन्हें अपनी ऐतिहासिक एवं भौगोलिक विरासत से जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर विद्यार्थियों में सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और राष्ट्रीय चेतना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चमोला के निर्देशन एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती सुषमा देवी, श्री अनवारुल हुसैन, श्री तेजपाल सिंह, सुश्री अंजलि, श्री ब्रह्मपाल सिंह, श्री दलबीर सिंह, मोहम्मद जावेद, श्री नौशाद, श्रीमती पूनम, सुनीता, गीता तथा महेंद्र सिंह ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी शिक्षकों एवं सहयोगियों ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए गतिविधियों को ज्ञानवर्धक, रोचक और अनुभवात्मक बनाने का प्रयास किया।
भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर का षष्ठम दिवस विद्यार्थियों के लिए इतिहास, भूगोल और राष्ट्रीय धरोहरों के ज्ञान से समृद्ध प्रेरणादायी अनुभव सिद्ध हुआ। विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह और जिज्ञासा के साथ गतिविधियों में भाग लेते हुए देश की नदियों, पर्वतों और ऐतिहासिक स्मारकों के प्रति अपनी समझ और रुचि को व्यक्त किया। विद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।


