आचार्य बालकृष्ण SFE उत्कृष्ट राष्ट्रीय एथनो-फार्माकोलॉजिस्ट पुरस्कार से सम्मानित

 

हरिद्वार, 27 फरवरी। भारत एवं विश्व स्तर पर आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसन्धान को बल देने वाले अग्रणी वैज्ञानिक और आयुर्वेदाचार्य, आचार्य बालकृष्ण को राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसन्धान संस्थान (NIPER) मोहाली में आयोजित सोसाइटी फॉर एथनोफार्माकोलॉजी की 13वीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ट्रांसलेशनल रिसर्च इन एथनोफार्माकोलॉजी – इंटेग्रटिंग ट्रैडिशनल मेडिसिन इन मॉडर्न हेल्थकेयर में “SFE उत्कृष्ट राष्ट्रीय एथनो-फार्माकोलॉजिस्ट पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान Society for Ethnopharmacology (SFE), India द्वारा एथनोफार्माकोलॉजी एवं पारंपरिक औषधियों के शोध तथा विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शोधकर्ताओं को प्रदान किया जाता है।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, यह आयुर्वेद की उपलब्धि है, यह सम्पूर्ण भारत की उपलब्धि है। पतंजलि, आयुर्वेद के उत्थान और जनमानस को सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसी दिशा में प्रगतिशील है।
आगे उन्होंने बताया कि पतंजलि द्वारा विकसित 90 से अधिक साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक दवाइयाँ और प्राकृतिक उपचार आज लोगों को सुरक्षित तथा प्रभावी स्वास्थ्य विकल्प प्रदान कर रहे हैं। पतंजलि के वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोधकार्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो रहे हैं, जो आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों तथा पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर वैज्ञानिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
इस अवसर पर पतंजलि के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण जी की यह उपलब्धि हमारी प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और साक्ष्य-आधारित शोधों की दिशा में पतंजलि की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का मजबूत प्रमाण है। आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में पतंजलि ने आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण में प्रस्तुत करने के लिए अनेक शोध कार्य किए हैं।
आगे उन्होंने बताया कि आचार्य बालकृष्ण जी को उनके शोध कार्यों के लिए अनेक वर्षों से स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित वैज्ञानिकों की सूची में विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में भी सम्मिलित किया जा रहा है।
उक्त सम्मान को प्राप्त करते हुए पतंजलि ने इसे आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के विज्ञान-आधारित पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। यह पुरस्कार न केवल आचार्य बालकृष्ण की व्यक्तिगत उत्कृष्टता का सम्मान है, बल्कि भारतीय परंपरागत चिकित्सा ज्ञान को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के बीच प्रतिष्ठित करने का संकेत भी है।

Related Posts

राज्य सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट से मिली मंजूरी

  *देहरादून, 25 अगस्त 2026 सूबे में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य कैबिनेट ने आज ‘उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026’ को मंजूरी दे ही है। इस नीति का…

जिलाधिकारी ने जिला पर्यटन कार्यालय का किया औचक निरीक्षण, पर्यटन कार्यालय भवन एवं परिसर का लिया जायजा

    *हरिद्वार, 25 अगस्त 2026 जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित ने मंगलवार को जिला पर्यटन कार्यालय का औचक निरीक्षण कर कार्यालय की व्यवस्थाओं, कार्यप्रणाली तथा पर्यटन कार्यालय भवन एवं परिसर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *