जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में जिला वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई।

हरिद्वार 14 जनवरी 2026

बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिर क्षेत्र में वनाग्नि की घटित होने वाली घटनाओं पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए साथ ही उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी  को मंदिर समितियो को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग तथा फायर जैकेट, अग्निशमक इक्यूपमेंट की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि कोई भी वांग्नि की घटना घटित होने पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके।

जिलाधिकारी ने अग्निशमक विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि चंडी देवी मंदिर एवं मनसा देवी मंदिर क्षेत्र के यातायात मार्ग पर फायर बिग्रेड की गाड़ी सहित एम्बुलेंस के द्वारा भी एक माॅक अभ्यास किया जाए जिससे आपातकालीन स्थिति में मंदिर तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि आपदा मित्रों को ट्रेनिंग एवं वन अग्नि नियंत्रक संबंधित आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराए जाए।

हरिद्वार जनपद में वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वन विभाग व प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि हरिद्वार जनपद वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील सभी क्षेत्रों में फायर ड्रिल की जा रही है। इसके अंतर्गत सड़क किनारे गिरे सूखे पत्ते को नियंत्रित कर एवं फुकान कर हटाया जा रहा है, ताकि आग की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह कार्यवाही केवल मुख्य मार्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों में भी विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं।

इसके अलावा वन विभाग की ओर से जागरुकता अभियानों के माध्यम से ग्रामीणों व स्थानीय लोगों को भी सतर्क किया जा रहा है, ताकि वे समय रहते वनाग्नि की घटनाओं को पहचान कर विभाग को सूचित करें। विभागीय टीम जंगलों में आग पर नियंत्रण के लिए सुसज्जित उपकरणों और संसाधनों के साथ तैयार हैं। वन विभाग का लक्ष्य इस वर्ष वनाग्नि की घटनाओं को शून्य तक सीमित करना है। वनाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आगजनी गतिविधियों से बचें और आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग या प्रशासन को सूचित करें, ताकि वनों की जैव विविधता व संपदा की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ आर के सिंह, उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी आशुतोष भंडारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नेहा झा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत सहित अग्निशमन एवं राजाजी विभाग के अधिकारी मौजूद थे।

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