परंपरांओं और शास्त्रों के अनुसार ही दी गयी बिंदू गिरी को भूसमाधि-श्रीमहंत रविन्द्रपुरी

हरिद्वार, 10 फरवरी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा है कि गोस्वामी समाज संतों की संतान है। जो सन्यासी गृहस्थ जीवन अपना लेते थे। शास्त्रों के अनुसार उन्हें दशनाम गोस्वामी कहा जाता है। दशनाम गोस्वामी समाज की महिला हो या संत सभी को देहांत के बाद भूसमाधि या जल समाधि दी जाती है। मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ट्रस्टी बिंदु गिरी को समाधि दिए जाने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि परंपरा और शास्त्रों के अनुसार ही बिंदु गिरी को समाधि दी गयी है। इस संबंध में कुछ लोग अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को बयानबाजी करने से पहले शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए। परंपरांओं पर सवाल उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। भारत माता मंदिर के महंत निरंजनी अखाड़े के महामण्डलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरांए अत्यन्त विशिष्ट हैं। परंपरांओं के तहत ही बिंदु गिरी को भूसमाधि दी गयी है। परंपरांओं पर विवाद करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बिंदु गिरी ने संतों के सानिध्य में रहते हुए हमेशा ही सनातन धर्म के संरक्षण संवर्द्धन में योगदान किया। मनसा देवी मंदिर में आने श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान करने में भी उनका विशेष सहयोग रहा। बिंदू गिरी जैसी पुण्यात्मा के देहवसान के बाद उनके संबंध में विवाद उत्पन्न करना किसी भी तरह से उचित नहीं है।

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