देहरादून।
उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमि को यूआईआईडीबी (UIIDB) के माध्यम से निजी क्षेत्र को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ आज दिनांक 10-02-2026 को ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन, शैलेंद्र दुबे ने माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिख कर इस निर्णय को प्रदेश एवं पावर सेक्टर के हितों के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाकपत्थर एवं ढालीपुर स्थित विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित कुल 76.7348 हेक्टेयर भूमि को शासनादेश दिनांक 03 दिसंबर 2025 के माध्यम से UIIDB को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं एवं जिला प्रशासन को भूमि का दाखिल-खारिज, सीमांकन एवं अधिग्रहण की कार्यवाही के आदेश जारी किए गए, जिससे पावर सेक्टर में गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।
शैलेंद्र दुबे ने अपने पत्र में लिखा कि यह भूमि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से जल विद्युत परियोजनाओं के वर्तमान संचालन एवं भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए आवंटित की गई थी। डाकपत्थर क्षेत्र से यमुना स्टेज-I एवं स्टेज-II, व्यासी परियोजना, लखवाड़, किशाऊ, टौंस एवं अन्य कई महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन एवं निर्माण किया जा रहा है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना लगभग असंभव है।
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन ने लिखा कि भूमि हस्तांतरण से न केवल प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, बल्कि भारत सरकार की यमुना पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत लखवाड़ एवं किशाऊ जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं भी प्रभावित होंगी।
शैलेंद्र दुबे ने माननीय मुख्यमंत्री से पत्र के माध्यम से मांग कि UIIDB के माध्यम से प्रस्तावित भूमि हस्तांतरण आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए एवं यह भी स्पष्ट किया कि यदि पावर सेक्टर की भूमि को एकतरफा तरीके से निजी क्षेत्र को सौंपने का प्रयास किया गया, तो देशभर के बिजली कर्मी एवं इंजीनियर इसके खिलाफ सशक्त आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
